Bap-Dada's LATEST & FINAL part

DEDICATED to Om Mandli ‘Godly Mission’ to present posts regarding the LATEST & FINAL part of BapDada of World Purification & World TRANSFORMATION – through Divine Mother Devaki - SAME soul of 'Mateshwari', Saraswati Mama.
Post Reply
User avatar
destroy old world
Vishnu Party
Posts: 136
Joined: 09 Jul 2007
Affinity to the BKWSU: ex-BK

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by destroy old world »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

ॐ... "पिताश्री" शिवबाबा याद है?

शिवबाबा की वाणी
14.07.2022 - रायपुर

"मीठे बच्चे .. सही मेहनत तो अभी है - अभी से पहले तो खेले, खाए, कूदे हो। सच्चा-सच्चा पुरुषार्थ अगली क्लास में जाने का, तो इस समय है - पूरे ब्राह्मण परिवार का - इस समय, यह अंतिम समय का पुरुषार्थ है!"

Link: https://www.youtube.com/watch?v=AT6swY8aLvI

अच्छा .. हर एक बच्चा बाप के प्यार में मगन है ना? *प्यार ऐसा - कि बस देखते रहे, और मुख से कुछ आवाज ना आवे।* हर एक बच्चा बाप के दिल के अती समीप है ना? सभी बाप से पूछते हैं – ‘बाबा, क्या आप हमसे प्यार करते हैं?’ हर एक बच्चा बाप से पूछता है – ‘क्या आपको हमसे प्यार है?’ तो बाप क्या कहेगा? जितना आप करते हैं ना, उससे 100 गुणा बाप को आपसे प्यार है - 100 गुणा! आपका एक गुणा कितना पावरफुल होगा! और बाप का 100 गुणा कितना पावरफुल होगा! तो अभी बच्चे, चेक करें - एक गुणा प्यार है, या आधा गुणा प्यार है, या 100 गुणा प्यार है? 100 का डबल करेंगे, तो कितना हुआ? कितना हुआ? आप जितने गुणा बढ़ाते जाएंगे, तो बाप की भी गुणा बढ़ती जाएगी। और आपका एक गुणा कम हुआ, तो ऑटोमेटिक बाप का भी 100 गुणा कम हो जाएगा। तो सभी बच्चे चेक करें – ‘मेरे दिल में दिलाराम है? मेरा निश्चय पक्का है?’ या कोई परिस्थिति आ गई, छोटी समस्या आ गई - किसी समस्या के साथ मेरा निश्चय तो नहीं डगमगाता? या मुझे किसी सवाल का जवाब नहीं मिला, बाबा ने इसका जवाब नहीं दिया - क्या तब तो निश्चय नहीं डगमगाता? क्या बाबा ने मुझे अपने पास बुलाके टोली नहीं खिलाई, मैंने इतना पावरफुल संकल्प किया कि आप मुझे टोली जरूर खिलाएंगे, बाप ने टोली नहीं खिलाई - क्या उसमें तो संशय नहीं आ जाए? क्या बाप ने मेरी तारीफ नहीं किया, मेरी महिमा नहीं की, कि मैंने इतनी सेवा की, और बाप ने मेरी महिमा ही नहीं की - क्या इसमें तो निश्चय नहीं डगमगाता ना? या मुझे बाबा कहे कि - हाँ, आप बहुत तीव्र पुरुषार्थी हो, आप 8, 108 के माला का मणका बनोगे, बाप कहाँ इससे मना कर देवे - कहीं इसमें तो निश्चय नहीं डगमगाता ना?

*आप प्यार करते हैं - वो बाप की दिल में, रजिस्टर में लिखा जाता है।* आपका पुरुषार्थ बाप के रजिस्टर में लिखता है, बाप के दिल में बैठते हो, आपकी महिमा बाप करता है। बस यह सोचना कभी नहीं कि – ‘मेरी महिमा सबके बीच में क्यों नहीं हुई? मेरा सम्मान क्यों नहीं हुआ? मेरा मान क्यों नहीं हुआ? मुझे मान-सम्मान क्यों नहीं मिला?’ *108 की माला के मणके, इन सब चीजों से परे रहते हैं।* मुझे मान मिले या ना मिले, मुझे कोई देखे या ना देखे, पर मेरे बाबा ने मुझे देखा है। मुझे कोई प्यार करे या ना करे, मेरा बाबा मुझे प्यार करता है। दुनिया के लिए अच्छा बनना है - या बाप को देखना है? दुनिया के मनुष्यों के साथ चलना है - या बाप के साथ चलना है? बाहर भल देह-अभिमान आवे, पर यहाँ जब आते हैं ना, देही-अभिमानी बन जावे। क्योंकि अंतिम समय है - इस देह का त्याग करके जाना है, इसको साथ लेके नहीं जाना। पर कहाँ ना कहाँ, अभी भी देह-अभिमान के शिकारी हैं। ‘चेकिंग’ - मुझे किसके साथ चलना है? क्योंकि जिसके साथ चलना है ना, उसके जैसा बनना पड़ेगा। कैसा बनना है? बाप के जैसा बनना है! बाप कैसा है? ‘विदेही’ - है ना? तो बनना कैसा है? ‘विदेही’ बनना है। देह-अभिमान कभी फायदा नहीं करता, सदा नुकसान करता है - खुद का भी, और दूसरों का भी। बच्चों, अभी तो, *सही मेहनत तो अभी है - अभी से पहले तो खेले, खाए, कूदे हो। सच्चा-सच्चा पुरुषार्थ अगली क्लास में जाने का, तो इस समय है - पूरे ब्राह्मण परिवार का - इस समय, यह अंतिम समय का पुरुषार्थ है!*

इसीलिए हर एक बच्चा देखे कि मुझे बाप से कितना प्यार है? क्योंकि *संस्कार परिवर्तन सहज तब होगा जब दिल में एक दिलाराम होगा, जब दृढ़ता पक्की होगी, निश्चय होगा।* जैसे अभी बाप आए हैं, बच्चों के संकल्प चलते हैं – ‘अगर भगवान है, तो इतने कम क्यों? बहुत ज्यादा होने चाहिए!’ और अगर भीड़ लगा देंगे, तो फिर पीछे बैठके कहेंगे – ‘लो, भगवान तो सिर्फ आगे वालों से ही मिलता है, हम पीछे वालों का क्या होगा?’ दोनों तरफ से। अब एकांत में हैं, कम हैं, तो भी विचार है – ‘इतने कम क्यों?’ जब भीड़ हो जाएगी तो क्या कहेंगे – ‘इतने ज्यादा क्यों?’ जो इस कम भीड़ में है ना, यह सोचके बैठो – ‘वाह, वाह मेरा भाग्य, वाह मैं, वाह मेरा बाबा - कि आज मेरा बाबा मुझे इतना पास से देख रहा है, और मैं अपने बाबा को इतना पास से देख रही हूँ।’ यह नशा, यह खुशी होनी चाहिए। फिर आने वाले समय में क्या होगा - फिर एक बड़ी सी टीवी लगेगा जगह-जगह – अच्छा, अब फिर टीवी से देखो, क्योंकि बाप तो सबको देख लेगा ना, चाहे कितना भी भीड़ हो - पर बच्चे बाप को नहीं देख पाएंगे। तो यह समय अच्छा है - या आने वाला समय अच्छा है? [यह समय] यह समय, जो फिर नशे से कहना – ‘वाह, मेरा बचपन बड़ा प्यारा गुजरा है, मेरे बचपन में मेरे पिता ने मुझे गोद में खिलाया है।’ *और अभी जो थोड़ा संशय बुद्धि होके बैठे हैं ना, वो फिर बाद में क्या कहेंगे – ‘काश पहले ही मेरी बुद्धि का ताला खुल गया होता, मैं बाप के उस प्यार का अनुभव कर पाता!’*

यह निश्चय होना चाहिए, पक्का निश्चय – ‘मैं और मेरा बाबा, मेरे सामने मेरा बाबा बैठा है।’ कोई बच्चा यह नहीं सोचे – ‘बाबा, क्या अब मेरे जो संकल्प है, मेरा जो प्यार है, क्या आपके पास पहुँचता है? मैं इतना याद आपको करता हूँ, क्या वो याद आपको पहुँचती है?’ बाबा क्या कहेगा - आपकी याद से ही बाप आते हैं, नहीं तो बाप का क्या है इस पतित दुनिया में? आप बच्चों के पीछे ही बाप दौड़ते हैं, यहाँ-वहाँ, नहीं बाप को क्या आवश्यकता है? बाप तो अपना परमधाम में आराम से बैठेगा ना? बाप क्यों दौड़ते हैं? बाप को थोड़ेही राज्य करना है! आपको करना है! और बाप आपके पीछे-पीछे - आप कहाँ जाओ, बाप फिर वहीं पर आवे। अब बाप कहाँ जावे, फिर बच्चे वहीं पर आवे। तो बाप किसके लिए आते हैं? किसके लिए आते हैं? आप बच्चों के लिए आते हैं। *कभी अकेला नहीं छोड़ते - भक्ति मार्ग में कहो, या ज्ञान मार्ग में कहो।* तो कितना प्यार होना चाहिए - बाप से कितना प्यार होना चाहिए। यह एक जन्म ही बाप ने कहा – बच्चे, पवित्र बनो, बाप को याद करो। एक जन्म, और उसका फल अनेक जन्म मिलेगा। इसलिए बाप को कब संकल्प नहीं आता कि बच्चों से बाप कुछ लेवे, क्योंकि बाप तो दाता है ना? ठीक है?

*हर एक बच्चे को, बाप दादा का, दिलाराम बाप की बड़ी दिलवाले बच्चों को, बड़ा मीठा याद-प्यार। ऐसे बाप के प्यार के झूले में झूलने वाले बच्चों को बाप का याद-प्यार।*

*बाप को ज्ञान से नहीं, प्यार से पहचानो! बाप पहले इतना घंटा बोलते थे, इससे नहीं - बाप के प्यार की खुशबू से पहचानो!* पहले इतने घंटे थे, तो बाप ने सबको इतनी पालना दी, पर अब समय कम है, तो बाप को सभी बच्चों को पालना देनी है। सबको इतनी पालन दी, उसका रिटर्न बाप को क्या मिला? क्या परिवर्तन हुआ? हाँ, अनन्य बच्चे हैं, जिसने उस पालना का बड़ा दिल से स्वीकार करके पुरुषार्थ में आगे बढ़े। *और वही अनन्य बच्चे बाप के पास, यहाँ आ रहे हैं, पहुँच गए हैं, और पहुँच जाएंगे - जिन्होंने सच में बाप से प्यार किया है, और परिवर्तन, और सच्चे दिल से सेवा की है। वंडरफुल बात है ना, उन्हीं के ऊपर क्या कहते हैं, कि माया खा गई। माया ने नहीं खाया! माया से, माया की गोद से, बाप ने अपनी गोद में बिठाया है। ऐसे पुरुषार्थी बच्चों को माया खा जावे, ऐसा हो नहीं सकता! वो बच्चे तो सीधा बाप की गोद में बैठते हैं।*

जब माया की गोद से बच्चे उठते हैं, तो माया को तो दर्द होता है ना, तकलीफ होती है, चिल्लाएगी, शोर मचाएगी, ग्लानी करेगी। लेकिन जब बाप की गोदी से बच्चे जाते हैं, तो बाप शांत रहते हैं। बाप सोचते हैं - है तो बाप का ही, कोई बात नहीं, थोड़ा घूमके आ जाएगा। बाप कभी शोर नहीं मचाते। पर जब बाप बच्चों को माया की गोदी से उठाते हैं ना, तो माया बड़ा शोर मचाती है, चिल्लाती है – ‘कहाँ जा रहे हो मुझे छोड़के, ऐसे नहीं जाना।’ बड़ा प्यार भी करेगी, बात नहीं मानेंगे तो गुस्सा भी करेगी - फिर बात नहीं मानेंगे तो ग्लानी भी करेगी। लेकिन बाप यह नहीं करेगा ना - क्योंकि बाप तो अपने बच्चों से बड़ा प्यार करते हैं। बाप को प्यार है - माया को प्यार है? है? है! माया को भी बहुत प्यार है। हाँ, लेकिन *सच्चा प्यार किसका है? बाप का है। सदा साथ निभाने वाला प्यार किसका है? बाप का है ना?* माया तो क्या करती है? बीच रास्ते में जाके छोड़ देती है, ध्यान भी नहीं रखेगी - मेरे बच्चे ने कुछ खाया या नहीं, ठीक है या नहीं - माया ऐसी है! और बाप कैसा है?

ठीक है? *सदा खुश रहो, बाप साथ है, साथ रहेगा, और संगमयुग पर साथ निभाएगा, और परमधाम में भी साथ लेके जाएगा। ‘साथी सदा साथ है।’* और अगर कोई कमी कमजोरी भी आती है, या है, तो उसको निकालने में भी मदद करेगा, अकेला नहीं छोड़ेगा कि आप बदल जाओ – नहीं! अगर कमी-कमजोरी है भी, तो उसमें भी साथ देकर कमी-कमजोरी से मुक्त करेगा। *सच्चा बाप तो यही है ना, जो कैसी भी परिस्थिति में साथ नहीं छोड़े - कैसी भी परिस्थिति हो, सदा साथ निभावे। बस हमें बदलने का संकल्प मजबूत करना है। हमें परिवर्तन करने का संकल्प मजबूत करना है। प्यार में सब कुछ हो सकता है।* आज लौकिक में, प्यार में सब कुछ बदल सकता है। अच्छे से अच्छा, बुरा भी बन सकता है; और बुरे से बुरा, अच्छा भी बन सकता है! लौकिक दुनिया की आकर्षण में - प्यार में नहीं - सिर्फ आकर्षण में। *तो प्यार में कितनी ताकत होगी? कि आप बच्चे बाप के प्यार में चलकर, श्रीमत पर चलकर, पूरे विश्व को स्वर्ग बना देते हो।*

बाप को याद-प्यार मिल गया, आपको भी बड़ा याद-प्यार, और आपका बाप के दिल में वेलकम है! पहले भी दिल में ही थे, पर आज और पास आ गए। ठीक है? ठीक है - सभी बच्चे? कहाँ बैठे हो? दिल में हो ना? कहाँ बैठे हो? [दिल में] सच में दिल में हैं, या कोई जमीन पे बैठा है? दिल में कौन-कौन हैं? सभी हैं ना, जमीन पे तो कोई नहीं बैठा ना? *आप बाप के दिल में बैठे हो, और दिल में बैठकर, दिल का दरवाजा बंद कर लेवे, ताकि बाहर निकलने का रास्ता ही ना हो!* और वैसे भी दिल में आने का रास्ता होता है, जाने का नहीं, क्योंकि जाने का रास्ता बनाया ही नहीं है। दिल में आ गए - और एकदम बंद! बस आराम से बाप के दिल में बैठकर मौज मनाओ। जब कोई किसी बड़ी समस्या में होता है, और वो दौड़कर छोटे से घर में जाएगा, चारों तरफ से दरवाजा बंद कर लेगा - और क्या सोचता है? ‘अब मैं सेफ हूँ।’ क्या सोचता है? सेफ्टी का अनुभव करता है ना। वो एक लौकिक दुनिया की कहानी है, वहाँ एक सेकंड का सुकून मिला – ‘अब मैं सेफ हूँ, सब दरवाजे बंद हो गए।’ लेकिन वो लौकिक दुनिया का थोड़े समय का है, वहाँ परमानेंट कुछ भी नहीं है।

*पर जो बाप की दिल है ना, सोचो एक झोपड़ी जैसे बना है, बहुत प्यारी - और आप वहाँ गए, और सारे दरवाजे बंद। आप परमानेंट के लिए सेफ हो गए। सेफ!* अब माया आएगी भी ना, तो भल दरवाजा खटखटावे। वैसे तो बाप के दिल में माया कभी आ नहीं सकती, क्योंकि माया के लिए कभी दरवाजा ही नहीं खुलता, सिर्फ बच्चों के लिए बाप की दिल का दरवाजा खुलता है। और जो बाप की दिल में हैं, वहाँ माया पहुँच ही नहीं पाएगी - और जो दिल के बाहर आ गए, माया भी वार करेगी। वैसे तो बाप की दिल का बाहर जाने का दरवाजा नहीं है, पर बच्चे ही कहाँ ना कहाँ से ढूँढ लेते हैं। क्योंकि माया को भी देखते हैं – ‘वाह, बड़ी सुंदर दिख रही है। यहाँ मैं बैठा हूँ, है ना, यहाँ कोई चकाचौंध नहीं है, पर माया तो सजी-सजाई है।’ पर वो सजी-सजाई क्या करती है? कितने मंजिल से गिराती है? 100 मंजिल पर लेके जाएगी और फिर वहाँ से छोड़ेगी तो हड़गुड़ ही टूट जाते हैं। तो इसलिए माया की चमक को नहीं देखना। माया की चमक ऐसी है ना, जो जीवन बहुत कम कर देती है। जो बाप के प्यार में सदाकाल का सुख है ना, वो सुख माया के पास कभी नहीं होगा।

अच्छा बच्चों फिर मिलेंगे ...

ब्रह्मा बाप से प्यार है? बहुत प्यार है ना, यह ब्रह्मा बाबा की लीला वंडरफुल लीला है!

(फिर बाबा ने सभी बच्चों को दृष्टि देकर, विदाई ली)!
User avatar
Zorba the Greek
Posts: 67
Joined: 03 May 2019
Affinity to the BKWSU: BK supporter
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To engage in fruitful discussions

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by Zorba the Greek »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

Versions of Shiv Baba
14.07.2022 - Raipur

"Sweet children .. real effort is to be made now – before this you played, ate, and pranced. It is now that you have to make real efforts in order to go to the next Class – for the entire Brahmin Family – at this time, your efforts are of the final period!"

Link: Baapdada Milan - 14.07.2022

OK .. Every child is merged in the Love of the Father, is it not? *Your Love is such – that you just keep watching, and no sound emerges from your mouth.* Every child is extremely close to the Father’s Heart, is it not? Everyone asks the Father – ‘Baba, do You Love us?’ Every child asks the Father – ‘Baba, do you Love me?’ So, what would the Father say? The Father has 100 times more Love for you – 100 times more – than the Love you have for Baba! How powerful would your Love be - for Baba! And how Powerful would the Father’s 100 times more Love be - for you! So, now you children should check – do you have as much Love, or half as much Love, or 100 times more Love? How much would double of 100 be? How much would that be? As much as you increase your Love, the Father’s Love would also increase accordingly. And if a little of your Love decreases, then the Father’s Love would also decrease hundred-fold of that decrease in your Love. So, all the children should check – ‘is the Comforter of Hearts within my heart? Do I have firm faith?’ Or, if any adverse situation arises, or if a little obstacle comes – does my faith fluctuate when such obstacle comes? Or, if I do not get a response to any question, if Baba has not given a response to my question – then does my faith fluctuate? If Baba does not call me up to Him and feed me toli, even when I emerged a powerful thought that Baba would definitely feed me toli, but the Father did not feed me toli – does any doubt arise in my mind due to this? If the Father did not praise me, if he did not glorify me, I performed so much service and yet the Father did not glorify me – then does my faith fluctuate in this? Or, if Baba tells me – yes, you are a very fast effort-maker, you will become a Bead of 8, or 108, and if the Father then declines that – would my faith fluctuate in this?

*When you Love Baba – that gets written within Baba’s Heart, in His Register.* Your efforts are written in the Father’s Register, you sit within the Father’s Heart, you are glorified by the Father. Just never think – ‘why was I not glorified in the midst of everyone? Why was I not given regard? Why was I not respected? Why did I not get that regard and respect?’ *The Beads of the Rosary of 108 remain beyond all these aspects.* Whether I receive respect or not, whether someone sees me or not, but my Baba has seen me. Whether someone loves me or not, my Baba Loves me. Do you have to become good for the world – or do you have to see the Father? Do you have to go along with the human beings of the world – or do you have to go along with the Father? There may be body-consciousness when you are outside, but when you come here, you should become soul-conscious. Because this is the final period of time – you have to leave this body and go, you cannot go along with this body. But somewhere or the other, you are still victims of body-consciousness. Check – with whom have I to go along? Because you have to become like the One with whom you have to go along. How have you to become? You have to become like the Father! How is the Father? ‘Bodiless’ – is He not? So, what should you become? You should become ‘bodiless’. Body-consciousness never benefits you, it always causes a loss – for your own self, as well as for others. Children, *real effort is to be made now – before this you played, ate, and pranced. It is now that you have to make real efforts in order to go to the next Class – for the entire Brahmin Family – at this time, your efforts are of the final period!*

This is why every child should check as to how much Love there is for the Father! Because *it will be easy to transform your sanskars only when the ‘Comforter of Hearts’ is within your heart, when you determination is firm, and when you have faith.* Just as, the Father has now come, and the children have such thoughts – ‘if this is God, then why are there so few? There should have been many more!’ And if there is a big crowd, then those who sit at the back will say – ‘look, God only meets those who are in front, what will happen to us who are sitting behind?’ They will speak in both ways. Now you are a few sitting in solitude, and still they think – ‘why are there so few?’ When there is a crowd then what would they say – ‘why are there so many?’ Those who are in this small crowd should sit here and think – ‘wow, wow my fortune, wow me, wow my Baba – today, my Baba is looking at me from so close, and I am seeing my Baba so close to me.’ You should have this intoxication and Happiness. Then, what would happen in times to come – then there will be a huge TV screen at various places – OK, now you may see on TV - because the Father will see everyone, regardless of how much crowd there is – but the children will not be able to see the Father. So, is this time good – or the time to come would be good? [This time] This time, when you can say with intoxication – ‘wow, I have had a very lovely childhood, in my childhood my Father has fed me in His Lap.’ *And what would those who are sitting with even a little doubt in their intellects say later on – ‘I wish the lock on my intellect had opened earlier, I would have been able to experience that Love of the Father!’*

You should have this firm faith – ‘I and my Baba, my Baba is sitting in front of me.’ No child should think – ‘Baba, does my Love, and does my thought which I have now, reach You? I Remember You so much, does this Remembrance reach You?’ What would Baba say – Baba comes only because of your Remembrance, otherwise what has Baba to do in this impure world? The Father runs only behind you children, here and there, otherwise what need is there for the Father? The Father would sit comfortably in His Supreme Abode, would He not? Why does the Father run after you? The Father does not have to rule! You have to rule! And the Father is behind you – wherever you go, the Father would then come there itself. Now, wherever the Father goes, the children should then come there itself. So, for whom does the Father come? For whom does He come? He comes for you children. *He does not leave you alone at anytime – whether on the path of Devotion, or on the path of Knowledge.* So, how much Love should you have – how much Love you should have for such a Father! Only in this one birth has Baba said – children, Remember the Father, become Pure. The fruit of this one Birth will be received for many births. This is why the Father does not have the thought of taking anything from the children at any time, because the Father is the Bestower, is He not? OK?

*To each and every child, to the children of the Father who is the ‘Comforter of Hearts’, to those who have large hearts, BapDada’s extremely Sweet Love and Remembrance. The Father’s Love and Remembrance to such children who swing in the Father’s ‘Swing of Love’!*

*Do not try to ReCognize the Father through Knowledge, but through Love! The Father used to speak for so many hours before - not by this – you should ReCognize the Father through the fragrance of His Love!* Before there was so much time, so the Father gave so much sustenance to the children; but now there is little time, and the Father has to give sustenance to all the children. What return did the Father receive after giving so much sustenance? What transformation took place? Yes, there are some unique children, who progressed in their efforts after having accepted that sustenance with their large hearts. *And those very same unique children are now coming here to the Father, they have reached here, and others will reach here – those who have truly Loved the Father, who have transformed, and who have performed Service with a true heart. It is a wonderful aspect, what they say about them, that Maya ate them up. Maya did not eat them up! The Father made them sit in His Lap from being with Maya, from Maya’s lap. It can never be that Maya could eat up such children who are such effort-makers! In fact, those children sit directly in the Father’s Lap.*

When the children leave Maya’s lap, then Maya is in pain and is troubled – Maya will shout, scream, and defame you. But when the children leave the Father’s Lap, the Father remains peaceful. The Father thinks – they are the Father’s anyway, it does not matter, they will roam around a little and then come back. The Father never screams. But when Baba takes the children away from Maya’s lap, then Maya screams and shouts loudly – ‘where are you going by leaving me, do not go away in this way.’ Maya will also love you a lot, and if you do not listen then she would even become angry – and if you still do not listen then she will also defame you. But the Father would not do this – because the Father has great Love for His children. The Father has Love – does Maya have love? Does she? She does! Even Maya has a lot of love for you. Yes, but *who has true Love? Baba. Whose Love is everlasting? The Father’s Love, is it not?* What does Maya do? She will go in the middle of the road and leave you there, and she will not even pay attention to you – whether my child has eaten anything or not, whether he/she is fine or not – such is Maya! And how is the Father?

OK? *Always be Happy – the Father is with you, He will remain with you, and He will accompany you during this Confluence Age, and He will also take you along with Him to the Supreme Abode. ‘The Companion is always with you.’* And if any deficiency or weakness comes, or if you have any of them, then He will even help you to become free from them, He will not leave you alone for you to transform by yourself – no! If there is any deficiency or weakness, then even in that He will accompany you, and free you from such deficiency or weakness. *This is the true Father who will not leave you under any adverse circumstances – He will always accompany you whatever may be the adverse circumstances. You just have to make your thought of transformation strong. You have to make your thought of transformation strong. Everything is possible through Love.* Today, in the ‘lokik’ world, everything can change through love - the one who is very good can also become bad; and the one who is very bad can also become good, through the attractions of the corporeal world – not through love – only through its attractions. *So, how much power exists in true Love – that you children transform the whole world into Heaven by experiencing the Father’s Love, and by following His Shrimat.*

The Father has received your Love and Remembrance - great Love and Remembrance to you also, and you are welcome within the Father’s Heart! You were within His Heart before also, but today you have come more close. OK? Are all the children fine? Where are you sitting? You are within My Heart, are you not? Where are you sitting? [within Your Heart] Are you truly within the Heart, or is anyone sitting on the ground? Who all are within the Heart? All of you are there - no one is sitting on the ground, is it not? *You are sitting within the Father’s Heart, and after sitting in His Heart, close the Door of the Heart, so that there is no way for you to get out!* And, in any case, there is always a way to come within the Heart, not to go out, because no way has been made to go out. You come within the Heart – and everything gets closed! You only have to enjoy by sitting comfortably within the Father’s Heart. When anyone is facing great obstacles, he would run and go to a little house, and close the doors all around – and what would he think? ‘Now, I am safe.’ What does he think? He experiences safety, is it not? That is the story of the ‘lokik’ world, there he would be at rest for one second – ‘now, I am safe, all the doors are closed.’ But that rest of the ‘lokik’ world lasts for a short period of time, nothing is permanent there.

*But think that the Father’s Heart is like a small cottage which is very Loveful – and you go there, and close all the doors. You become safe permanently. Safe!* Then, even if Maya comes she may continue to knock on the door. Actually, Maya can never come within the Father’s Heart, because no door opens for Maya - the Door of the Father’s Heart opens only for His children. And Maya will not be able to reach up to those who are within the Father’s Heart – and Maya will attack those who leave His Heart. Actually, there is no door to go out of the Father’s Heart, but the children, themselves, find a door somewhere or the other. Because they also see Maya – ‘wow, she is looking very beautiful; I am sitting here, that is right, but there is no glamour here, and Maya is fully decorated.’ But what does that decorated one do? From how many floors does she make you fall? She will take you to the hundredth floor and then leave you from there, and then your bones get crushed. This is why you should not look at Maya’s glamour. Maya’s glamour is such, that it shortens your life. The eternal Happiness which you experience from the Father’s Love – such Happiness can never be with Maya.

OK children, we will Meet again ...

Do you have Love for Father Brahma? You have a lot of Love, do you not? This Play of Father Brahma is a wonderful Play (‘Lila’)!

(Then Baba took leave, after giving ‘dhristi’ to all the children)!
User avatar
destroy old world
Vishnu Party
Posts: 136
Joined: 09 Jul 2007
Affinity to the BKWSU: ex-BK

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by destroy old world »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

ॐ... "पिताश्री" शिवबाबा याद है?

शिवबाबा की वाणी
21.08.2022 - सूरत

"मीठे बच्चे .. स्व-परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन करेंगे; और यह पक्का संकल्प है - जब तक परिवर्तन नहीं होगा, तब तक बाप भी नहीं जाएगा। सेवा तो बहुत बढ़ी, नाम तो बहुत ऊँचा हुआ, पर स्व-परिवर्तन में कमी रह गई। पर अब - ‘स्व-परिवर्तन’! बाप बोलेगा कम, और आप करेंगे ज्यादा – अब, बात या ज्ञान की चर्चा कम होगी, पर आपको परिवर्तन ज्यादा करना पड़ेगा; तब बाप कहेगा – वाह, मेरे लाल आ गए!"

Link: https://www.youtube.com/watch?v=kgBidmwwn3E&t=10s

अच्छा .. आज बापदादा अपने अति स्नेही बच्चों से मिलन मनाने आए हैं। *अति स्नेही किसको कहते हैं? जो बच्चे बाप के दिल के करीब होते हैं; जो बच्चे आज्ञाकारी होते हैं; जो बच्चे, जो बाप ने कहा, ‘हाँ जी, बाबा’ का पार्ट बजाने वाले बच्चे होते हैं; जो श्रीमत में मनमत या परमत को मिक्स ना करने वाले बच्चे होते हैं - वो बाप के अति स्नेही बच्चे होते हैं।* और आज बापदादा ऐसे स्नेही बच्चों से मिलने आए हैं। क्या सभी, बाप के स्नेही बच्चे हैं? हैं? मेजॉरिटी हैं। वाह! ऐसे ही अति स्नेही बच्चे, पूरे विश्व में एक राज्य, एक मत, एक भाषा, स्थापन करने के निमित्त बनेंगे, अर्थात खंड-खंड भारत को अखंड बनाने के निमित्त बनेंगे। सभी तैयार हैं? हैं? आपका साथी कौन है – बस, यह नशा नहीं उतरना चाहिए; फिर तो पूरे विश्व में एक राज्य आके ही रहेगा। जब अपने आप को अकेला अनुभव करते हैं ना, क्या कहते हैं – ‘बाबा, क्या करूँ, मैं अकेला हूँ ना, मेरा साथी कोई नहीं है, मैं अकेला क्या करूँगा?’ तब सोच लेना, अखंड भारत का सपना टूट रहा है। और जिस सपने में बाप है, सर्वशक्तिमान है, वो सपना कभी टूटता नहीं है। और क्या यह सपना आपने पहली बारी देखा है? क्या पहली बारी देखा है? नहीं, लाखों बार देखा है, और पूरा हुआ है। आज देख रहे हो - एक राज्य होगा, एक मत होगी, एक भाषा होगी, तो भी यह सपना पूरा होगा ही। आज तक सभी इंसानों ने मेहनत किया है ना, सभी मनुष्य आत्माओं ने मेहनत किया - लेकिन अब कौन मेहनत कर रहे हैं? आप जैसी महान आत्माएं - और बाप आपका बैकबोन है। और बैकबोन मजबूत है, तो कोई कार्य रुक नहीं सकता, और उसको कोई रोक नहीं सकता। तो सभी तैयार हैं? हैं? पक्का?

यह उमंग, यह उत्साह कभी कम नहीं होना चाहिए। कम उनका होता है जिनको गम खाता है। तो बाप बच्चों से पूछना चाहते हैं - किसको क्या-क्या गम है? है? किसको गम है? ‘भोजन कहाँ से मिलेगा’ गम है? नहीं! सूक्ष्म चेकिंग करें। ‘भविष्य क्या होगा’ गम है? सूक्ष्म चेकिंग करें। धंधा कैसे चलेगा, कार्य कैसे चलेगा - यह गम है? सूक्ष्म चेकिंग करें। हाँ, जो आलास्य-अलबेलेपन में पड़े रहते हैं, उनका बाप कुछ नहीं कहेगा। पर जो मेहनती बच्चे हैं, जो मेहनत करते हैं, उनको तो बेफिक्र होके उड़ना चाहिए, बेफिक्र बादशाह बन जाना चाहिए, क्योंकि बाप साथ है। बाप कहने मात्र से नहीं .. जब हम सर्वशक्तिमान .. और आपको तो कोई गम होना ही नहीं चाहिए, आपके पास तो 3 इंजन हैं, आपकी गाड़ी तो रफ्तार में चलनी चाहिए, क्योंकि तीनों इंजन ही पावरफुल हैं। तो रुकना चाहिए? थकना चाहिए? थकना चाहिए? नहीं। जब तक लक्ष्य नहीं आ जाता, जब तक लक्ष्य पर पहुँच नहीं जाते, तब तक ना रुकना है, ना थकना है। ठीक है? पक्का वायदा? और ‘एक धर्म, एक भाषा, एक राज्य’ लक्ष्य तक पहुँचने के लक्षण क्या हैं? क्या लक्षण हैं? सबसे पहले तो, जो मैंपन है ना - ‘मैंने यह किया, मैं हूँ, मेरा यह है’ - यह मैंपन जब तक अंदर रहेगा, तो लक्ष्य दूर चला जाएगा, या आप लक्ष्य से दूर चले जाएंगे।

जब तक निमित्त नहीं समझते – ‘मैं निमित्त हूँ, यह सारा कार्य मेरे बाबा करा रहे हैं, बाबा ने मुझे निमित्त बनाया है, तो मैं भाग्यशाली हूँ’। ये अंदर लक्षण धारण करने हैं। खुशी होनी चाहिए, नशा होना चाहिए कि इतनी भीड़ में मेरे बाप की दृष्टि मुझ पर पड़ी है। वैसे तो संसार में करोड़ों है ना, पर बाप की दृष्टि किसपे पड़ी है? गर्व से कहो, ‘बाप की दृष्टि मुझपे पड़ी है, मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि पूरे विश्व को एक करने का कार्य बाप ने मुझे दिया है’। हमेशा ये ही संकल्प अंदर में रखें, यह नशा नहीं उतरे। जब ऊपर होते हैं ना तब नशा चढ़ता है, अपने आप को निमित्त समझते हैं, पर जब देह और देह की दुनिया को देखते हैं ना, टेंशन तब आ जाता है। तो टेंशन नहीं करना है - क्या करना है? क्या करना है? ‘अटेंशन’ देना है। अटेंशन - ‘मैं पहरे पे हूँ, माया मेरे मन में, मेरे मन के गेट के अंदर प्रवेश नहीं कर सकती।’ जैसे पहरेदार पूरा अलर्ट होता है ना, आपको क्या रखना है? *जब अटेंशन रखेंगे तो टेंशन चला जाएगा; जब बाप को दिल में रखेंगे, तो पाप चला जाएगा; जब आत्म-अभिमानी स्थिति रखेंगे, तो देह-अभिमान चला जाएगा; जब सबके दिल में, सबके प्रति, एक दूसरे के प्रति प्रेम रखेंगे, तो नफरत चली जाएगी, गुस्सा चला जाएगा; जब बाप को अपना साथी समझेंगे, तो माया साथ छोड़के चली जाएगी। आपको किसी को छोड़ने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। एकदम आसान, सहज तरीका - बाप को दिल में बिठाओ, माया दूर-दूर तक नजर नहीं आएगी।* ठीक है?

जब भी आपस में मिलते हैं, बड़े प्रेम से मिले – ‘वाह, यह मेरा सतयुगी परिवार है, यह मेरा संगमयुगी परिवार है’। एक दूसरे का धर्म को देखकर आकर्षित होते हैं, तो यह प्यार नहीं है, यह परिवार की भासना नहीं है। ‘अच्छा, आप फलाने धर्म के हो; अच्छा, मैं भी वही हूँ’ - बस, अपनी जोड़ी बनाते हैं। क्या जो आपके धर्म का नहीं है, क्या उससे प्रेम नहीं है? उससे प्यार नहीं है? यही मेरापन अंदर से निकालना है - कि मैं यह हूँ, मैं वो हूँ। मैं कौन हूँ? सभी आवाज से बोलेंगे, ताकि आपको आपकी आवाज सुनाई देवे। मैं कौन हूँ? [आत्मा] ‘मैं आत्मा’। मेरा घर कहाँ है? [परमधाम] मेरे पिता का नाम क्या है? [शिवबाबा] आप करने क्या आए हैं? .. देखा, क्या करने आए हैं - किसी को नहीं पता। ‘विश्व परिवर्तन करने’! और क्या करने आए हैं? ‘अखंड भारत बनाने’! ‘एक धर्म, एक राज्य स्थापन करने’! यह स्वमान कभी भूले नहीं। आप करने क्या आए हैं? .. इसमें नशा नहीं चढ़ा! .. नशा चढ़ना चाहिए, खुशी होनी चाहिए; कहाँ-कहाँ बच्चे तो, बाप बैठा है, बाप के सामने ही सो जाते हैं, वो कहाँ से अखंड भारत बनाएंगे? बाप आए हैं, बाप के सामने ही साइंस के साधन में बिजी रहते हैं, वो कहाँ से अखंड भारत बनाएंगे? बाप बैठा है, पर बाप की बातें कहीं किनहीं बच्चों के ऊपर से जाती हैं - वो क्या करेंगे? विचार करना। इसलिए बाप क्या कहते हैं - मुट्ठी भर बच्चे पूरे विश्व को परिवर्तन कर देते हैं - और उनके साथ कौन होता है? पांडवों की सेना क्या थी? मुट्ठी भर थी ना - पर साथ में कौन था याद रखें। साथ में कौन था? क्योंकि जब साथी को भूल जाते हैं ना, माया तभी वार करती है।

यह बाप का सभी बच्चों के प्रति डायरेक्शन है – ‘देह और देह के धर्म से ऊपर उठे’। जिन बच्चों को बाप ने इतने लंबे समय तक पढ़ाया है, अगर वो बच्चे भी देह और देह के धर्म, देह की दुनिया में ही फंसे हैं, तो वो क्या विश्व का परिवर्तन करेंगे? जिसने स्वयं का परिवर्तन नहीं किया, जिसने स्वयं को नहीं बदला, तो विश्व परिवर्तन कैसे बदलेंगे? इस परिवार में जुड़ते ही, सभी बच्चों के मन से, देह और देह के संबंध, देह के रिश्ते से ऊपर उठ जाना चाहिए। ठीक है? कहने मुआफिक ‘हाँ, हाँ’ नहीं करना है, परिवर्तन करना है।

किन्ही बच्चों में तो आज भी कितना गुस्सा है ना, किसी की बात सुनना ही नहीं चाहते - बस, अपनी सुनाना चाहते हैं, ‘बस, बैठो और मेरी सुनो, और जो मैं कहता हूँ वही करो’ - यह श्रीमत है? और अगर उनके मन की नहीं की, तो गुस्सा आता है। क्या ये देवताओं के लक्षण हैं? क्या कहेंगे - बाप प्यार का सागर तो है ही, पर धर्मराज पुरी में जाने से पहले-पहले, यहाँ पर आप बच्चों को डायरेक्शन दे रहे हैं, समझा रहे हैं। क्रोध तो बंदर में होता है। क्या आप बंदर है? है? लालच, लोभ, जो कई पीढ़ी तक इकट्ठा करके रखे हैं, यह तो बंदर में होता है। क्या आप बंदर है? चेक करें, सूक्ष्म में चेक करें। ‘ईर्ष्या’- ईर्ष्या, टू मच बंदर में ही होती है, बहुत ज्यादा। अब चेक करें क्या आप बंदर है? ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, नफरत, गुस्सा, लालच - ये कभी किसी भी देवताओं में पाए गए - हैं? हैं? तो आप बनने वाले क्या है? .. देखा, आवाज नहीं निकला! मतलब कहाँ ना कहाँ गड़बड़ है। क्या बनने वाले हैं? [देवता] आवाज बुलंद है, तो परिवर्तन करने की कोशिश करेंगे? पक्का करेंगे? जिन्होंने हाथ उठाया बस वही करेंगे?
बाप से जब अगली बारी मिलने आओ ना, तो बाप के सामने चार्ट लेके आना, और सब यहाँ पर लाइन से रखना, तो बाप सबका चार्ट देखेगा - ठीक है?

एक होता है - इनमें भी - गुस्से, लालच, इसमें भी परसेंटेज होती है - किसी में 100 पर्सेंट होता है, किसी में 80-70 होता है, पर यह सब बाप के सामने नहीं दिखेगा, अब नहीं दिखेगा, यह कहाँ दिखेगा? जब अपने-अपने लौकिक स्थानों पे चले जाएंगे, क्योंकि वहाँ देखने वाला कौन है? वहाँ देखने वाला भी बाप है। अब याद रखना, अगली बार आएंगे तो नाम लेके उठाएंगे। चलेगा? बच्चे कहेंगे ‘अगली बार हम आएंगे ही नहीं’। अगर नहीं आएंगे, तो बाप का क्या जाएगा? घाटा किसका होगा? क्योंकि आप नहीं आएंगे तो कोई और आएगा, सदा याद रखना - ठीक है? आप खुद ही अपना नाम लिखना – ‘बाबा, मुझसे यहाँ मिस्टेक हुई है, यहाँ गड़बड़ हुआ है, मेरा इतने पर्सेंट कम हो गया’। बच्चे जब परिवर्तन नहीं करेंगे, स्व-परिवर्तन नहीं करेंगे, तो विश्व कब परिवर्तन करेंगे? समय का डंका बजने वाला है, तो क्या करना है? घंटी बजावे? बजावे? तैयार है? पक्का? घर जाके लेटर लिखना, ठीक है - कि तैयार है या नहीं।

अच्छा, बाप का पूरे ब्राह्मण परिवार से बहुत प्यार है। सबसे प्यार है - और रही ग्लानि करने की और गाली देने का संस्कार, वो तो बाबा द्वापरयुग से ही खाते आ रहे हैं, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। यह तो बच्चों का कोई भी, भक्ति मार्ग में भी कोई दुखी हुआ, तो भी गाली किसको देगा? बाप को देगा। भले पूरा, कोई भी, कैसा भी बच्चा, बाप की ग्लानि करे, गाली देवे, बाप कभी नहीं लेगा - क्योंकि बाप को यह तो पक्का है ना। तो आपको भी क्या करना है? जो कोई आपको गाली देवे, या ग्लानि करे, तो लेनी चाहिए? लेनी चाहिए? जैसा उसने आपको बोला – ‘आप ऐसे हो’! .. हो? तो फिर किस बात का टेंशन? जब आप ही ऐसे नहीं हो, तो फिक्र क्यों? क्या बनना है? बेफिक्र बनना है। फिक्र वाले बादशाह कभी उड़ा नहीं करते, उड़ते तो वही हैं जो बेफिक्र होते हैं - ठीक है?

अच्छा बच्चों .. *बापदादा बच्चों से इतना प्यार करते हैं, बच्चों ने कहा - ‘बाबा हम बहुत दुखी हैं, परमधाम छोड़ दो’ - बाप ने परमधाम छोड़ा है। बच्चों ने कहा – ‘बाबा, हम मधुबन नहीं पहुँच पा रहे, हम नहीं आ सकते’; बच्चों ने कहा – ‘बाबा, हम बहुत पीछे बैठते हैं’ - तो बाप ने मधुबन छोड़ दिया। बाप तो छोड़ते ही आ रहे हैं, पर आप बच्चों ने क्या-क्या छोड़ा वो जरूर बताना।* ठीक है? सब खुश हैं ना? हैं? पक्का? *‘स्व-परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन करेंगे’। और यह पक्का संकल्प है - जब तक परिवर्तन नहीं होगा, तब तक बाप भी नहीं जाएगा।* तो जो बच्चे भी कहते हैं, कोई भी – ‘बाबा, ऐसे ही, किसी को भी, या मधुबन को, या कोई स्थान को बाबा नहीं छोड़ सकता’। तो बाबा क्या कहेगा - इस पूरे विश्व में देखो, संसार को देखो, बाप के लिए तो यह पूरा विश्व ही क्या है? मधुबन है!

अच्छा फिर मिलेंगे ...

ब्रह्मा बाप से प्यार है? प्यार है ना! कितना प्यार है? किसके राज्य में चलना है? .. विचार में पड़ गए ना - कि ब्रह्मा बाप के कहें, या नारायण के कहें। नारायण के राज्य में चलना है - पर नारायण कौन बनेगा? ब्रह्मा बाप बनेगा! सभी बच्चे कहते हैं ना – ‘बाबा, आप थोड़ा समय आते हो, और चले जाते हो’! बाबा कहेगा - बाबा तो पूरी-पूरी रात भी बैठे रहे; आए, बच्चे सोके भी उठ जाते थे, तब भी बाप बैठे रहते थे। *सेवा तो बहुत बढ़ी, नाम तो बहुत ऊँचा हुआ, पर स्व-परिवर्तन में कमी रह गई। पर अब - ‘स्व-परिवर्तन’! बाप बोलेगा कम, और आप करेंगे ज्यादा - ठीक है? अब, बात या ज्ञान की चर्चा कम होगी, पर आपको परिवर्तन ज्यादा करना पड़ेगा; तब बाप कहेगा – वाह, मेरे लाल आ गए! किसके लाल हैं? हैं, पहले से ही हैं, पर लाल को और गाढ़ा करना है ना, जो कोई और रंग लगावे, तो दूसरा रंग चढ़े ही ना।* ठीक है? फिर मिलेंगे ...

अच्छा, उन बच्चों का भी याद-प्यार आया है, मधुबन निवासियों का भी याद-प्यार आया है। और जहाँ-कहाँ भी बैठे हैं, बच्चियों का, जो बच्चियाँ कहती हैं – ‘बाबा, मैं मजबूर हूँ’ .. उनको भी याद-प्यार बाप का, जो किसी ना किसी बंधन में बंधे हैं उन सबको याद-प्यार बाप का। और जो सामने बैठे हैं उनको, उनको भी कई गुणा याद-प्यार बाप का। ठीक है? बंधन में नहीं बंधना है, बंधने वाले, ‘राजा’ बना नहीं करते। जो बंध जावे वो कभी ‘राजा’ नहीं बनता। ‘स्वतंत्र’ रहना है - ठीक है? सभी को बाप का याद-प्यार!

अच्छा, बाप का भी सभी बच्चों को याद-प्यार। आप बच्चे अगर 100 गुणा करते हैं, तो बाप 200 गुणा करते हैं - क्योंकि बाप ‘गुणा’ करते हैं, और जो गुणा करते हैं, तो कितने गुणा हो जाते हैं! ठीक है? फिर मिलेंगे ...

(फिर बाबा ने सभी बच्चों को दृष्टि देकर, विदाई ली)!
User avatar
Zorba the Greek
Posts: 67
Joined: 03 May 2019
Affinity to the BKWSU: BK supporter
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To engage in fruitful discussions

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by Zorba the Greek »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

Versions of Shiv Baba
21.08.2022 - Surat

"Sweet children .. ‘you will carry out world transformation only through self-transformation’. And this is a firm thought – the Father will not go away until transformation takes place. Service has expanded greatly, the name (of Brahma Kumaris) has also become renowned, but there is still a deficiency in self-transformation. But now – ‘self-transformation’! The Father will speak less, and you will do more – now, the discourse of any issue, or of Knowledge will be less, but you will have to carry out greater transformation; then the Father will say – wow, My Lovers have come!"

Link: Baapdada Milan - 21.08.2022

OK .. Today, BapDada has come to celebrate a Meeting with His extremely Loving children. *Who is called ‘extremely Loving’? Those children who are close to the Father’s Heart; those children who are obedient; those children, who play the part of saying, ‘Yes, Baba’, to whatever Baba says; those children who do not mix the dictates of their own mind, or the dictates of others in Shrimat – they are the Father’s extremely Loving children.* And today, BapDada has come to Meet such Loving children. Are all the Father’s children Loving? Are you? The majority are. Wow! Such extremely Loving children become instrumental to establish one Kingdom, one doctrine, one language, in the whole world – that is, they become instrumental to make this divided Bharat into an united one (once again). Are all of you ready? Are you? Who is your Companion – this intoxication should not diminish; then, only one Kingdom will remain in the whole world. What do you say, when you experience yourself to be alone – ‘Baba, what can I do, I am all alone, I do not have any companion, what can I do alone?’ Then think that the dream of an united Bharat is breaking. And the dream, in which the Almighty Father is present, such a dream can never break. Is it that you have seen this dream for the first time? Have you seen this for the first time? No, you have seen it many hundred thousand times, and it has been fulfilled. You are seeing today – that there will be one Kingdom, one doctrine, one language, and this dream will definitely be fulfilled. Till today, all human beings have made efforts, have they not – all human souls have made efforts – but who is making efforts now? Great souls like yourselves – and the Father is your backbone. And when the backbone is strong, then no task can stop, and no one can stop that. So, are all of you ready? Are you? Certain?

This zeal and enthusiasm should never diminish. It diminishes for those who are afflicted with anxiety. So, the Father would like to ask the children – who has what types of anxiety? Do you have? Who has anxiety? Are you anxious that you will not get food? No! Carry out subtle checking. Are you anxious as to what the future will be? Carry out subtle checking. Are you anxious as to how your business or work will continue? Carry out subtle checking. Yes, the Father would not say anything about those who remain in laziness and carelessness. But the children who are hard-working, those who make efforts, should fly by being carefree, they should become carefree emperors, because the Father is with them. The Almighty Father is not there for namesake .. and you should not have any anxiety at all, because you have 3 Engines; your vehicle should proceed with speed, because all the three Engines are Powerful. So, should you stop? Should you feel tired? No. You should neither stop, nor feel tired, until your goal is achieved, until you reach your goal. OK? Is your promise firm? And what attributes are necessary to reach the goal of ‘one religion, one language, one Kingdom’? What are the attributes? First of all, this I-ness – ‘I did this, I am, this is mine’ – until this I-ness remains within, the goal will move further away, or you will move further away from the goal.

Until you consider yourself to be an instrument – ‘I am an instrument, this entire task is being performed by my Baba, Baba has made me instrumental, so I am very fortunate’ – you have to imbibe these attributes within you. You should have Happiness, you should have intoxication that the Father’s vision is falling over me in such a crowd. Well, there are tens of millions in this world, is it not – but over whom is the Father’s vision falling? Say with pride, ‘the Father’s vision is falling over me, I am very fortunate that the Father has given me the task of uniting the whole world’. Always keep these thoughts within you, and this intoxication should not diminish. When you are elevated then your intoxication rises, you consider yourself to be an instrument, but when you see the body and the corporeal world, then tension arises within you. You should not have tension – what should you have? What should you have? You must pay ‘attention’. Attention – ‘I am on watch, Maya cannot come within my mind, cannot enter inside the gate of my mind’. Just as a watchman is alert – what should you do? *When you pay attention, then tension will go away; when you keep the Father within your heart, then sin will go away; when you maintain a soul-conscious stage, then body-consciousness will go away; when you maintain Love for everyone, for one another, within your heart, then hatred will go away, anger will go away; when you consider the Father to be your Companion, then Maya will leave your company and go away. There will not be any need for you to leave anyone. Extremely easy way is to keep the Father within your heart, then Maya will not be seen anywhere.* OK?

Whenever you meet among yourselves, you should meet with great Love – ‘Wow, this is my Family of the Golden Age, this is my Family of the Confluence Age’. You get attracted by seeing the religion (or belief system) of one another - this is not (true) Love, this does not foster the feeling of a (true) Family. ‘Oh, you belong to this religion; well, I too am the same’ – then you become mates. Is it that you do not have Love for those who are not of your religion (or belief system)? Is it that you do not Love them? This is the My-ness which must be removed from within – that ‘I am this, I am that’. Who am I? Everyone should speak out with a sound, so that you are able to hear your own voice. Who am I? [a soul] .. I am a soul. Where is my Home? [the Supreme Abode] .. What is my Father’s Name? [ShivBaba] .. What have you come here to do? (children gave various replies) .. You see, what have you come here to do – no one knows (exactly). To transform this world! What else have you come here to do? To make Bharat united! To establish one religion, one Kingdom! Never forget this self-esteem. What have you come here to do? (children repeated simply) .. Your intoxication did not rise in this! .. Your intoxication should rise, you should have Happiness; the Father is sitting, and somewhere or the other, some children are asleep even in front of the Father – how can they make Bharat united? The Father has come, and some remain busy with the facilities of science (viewing their mobile phones) - how can they make Bharat united? The Father is sitting, but what the Father is saying goes above some children (they do not pay attention to same) – what will they do? Think about this. This is why, the Father says – a handful of children transform the whole world – and who is with them? What was the Army of the Pandavas? It was only a handful, is it not – but remember who was there with them. Who was present with them? Because Maya attacks you when you forget your Companion.

The Father’s direction for all the children is – ‘go beyond the body and the religion of the body’. If even those children, whom the Father has taught since such a long period, are still trapped in the body and in the religion of the body, then how will they carry out world transformation? How can one who has not transformed one’s own self, who has not changed one’s own self, carry out world transformation? As soon as you join this Family, all the children should go beyond the body and the relationships of the body, with their minds. OK? You should not say, ‘Yes, Yes’, just for namesake – you must carry out transformation.

Some children still have so much anger within them, they do not wish to hear anything from anyone, they just want to tell their own things - ‘just sit and listen to me, and just do whatever I tell you’ – is this Shrimat? And they become angry if one does not do what is within their mind. Are these the attributes of Deities? What can be said – the Father is the Ocean of Love anyway, but before you go to the court of Dharamraj, He is giving directions to you children here, and He is explaining to you. The monkeys have anger. Are you monkeys? Are you? Avarice and greed, which have been accumulated since many generations, are within the monkeys. Are you monkeys? Check this, carry out a subtle checking. Jealousy – too much jealousy is mainly only within monkeys. Now, check, are you monkeys? Jealousy, antagonism, abomination, hatred, anger, greed - have these ever been found in any Deities? Have they? So, what have you to become? .. You see, you did not respond! That means there is something wrong somewhere or the other. What have you to become? [Deities] .. Your voice is loud, so will you attempt to bring about transformation? Certainly? Only those who have raised their hands will attempt?
When you come to Meet the Father next time, come in front of the Father along with your Chart, and keep them here in a line (before the Father), then the Father will see everyone’s Chart – OK?

Among them - there is a percentage in anger and greed also – some have 100 percent, some have 70-80 percent - but all that will not be seen in front of the Father, it will not be seen now, where will it be seen? When you go back to your own ‘lokik’ places - because who is present to see there? The One who sees there is also the Father. Now, remember that when you come the next time you will be made to stand up by calling out your name. Will that do? The children would say, ‘we will not come the next time’. If you do not come, would there be a loss for the Father? Whose loss would it be? Because if you do not come, then someone else will come, always remember this - OK? You should write your name yourself – ‘Baba, I have made a mistake here, there has been a blunder here, I have lost this much percentage’. If the children do not transform, if you do not transform yourselves, then when would you transform the world? The bell of time will sound - so what should you do? Shall I sound the bell? Shall I? Are you ready? Certain? Go home and write a letter whether you are ready or not – OK?

OK, The Father has great Love for the entire Brahmin Family. He has Love for everyone; then there are the sanskars of defaming and abusing, which the Father has been listening to from the beginning of the Copper Age - this is not a big deal. Even on the path of devotion, if any of the children become unhappy, then too, whom would they abuse? They would abuse the Father. Even if any child abuses the Father or defames Him in any way, the Father will never take that – because the Father is sure of Himself, is He not? So, what should you also do? Whoever may abuse you or defame you, should you receive that? Should you receive that? If someone tells you – ‘you are like this’! .. Are you? Then, of what is there a tension? When you are not like that at all, then why should there be any concern? What have you to become? You have to become carefree. The emperors who feel concerned are unable to fly, only those who are carefree can fly – OK?

OK children .. *BapDada has so much Love for the children, when the children said – ‘Baba, we are very sad, leave the Supreme Abode’ – so, the Father left the Supreme Abode. Then, the children said – ‘Baba, we are unable to reach Madhuban (at Abu), we are unable to come’; the children said – ‘Baba, we have to sit far behind’ – so, the Father left Madhuban (at Abu). The Father has continued to leave, but definitely tell, what all you children have left.* OK? Are all of you Happy? Are you? Certain? *‘You will carry out world transformation only through self-transformation’. And this is a firm thought – the Father will not go away until transformation takes place.* Then too, some children also say – ‘Baba cannot leave anyone just like that, whether Madhuban (at Abu) or any other place’. Then, what would the Father say – look at this whole world, see this entire world, what is this whole world to the Father? It is ‘Madhuban’!

OK, we will Meet again ...

Do you have Love for Father Brahma? You do have Love for him! How much Love do you have for him? In whose Kingdom have you to go? .. You are thinking about this – whether you should say Brahma Baba or Narayan. You have to go to the Kingdom of Narayan – but who will become Narayan? Father Brahma will become! All the children say – ‘Baba, You come only for a short while, and then You leave’! Baba would say – Baba used to sit the entire night (in Madhuban, at Abu)’; He would come, some children would go to sleep and then awaken, then too the Father would remain sitting. *Service has expanded greatly, the name (of Brahma Kumaris) has also become renowned, but there is still a deficiency in self-transformation. But now – ‘self-transformation’! The Father will speak less, and you will do more – OK? Now, the discourse of any issue, or of Knowledge will be less, but you will have to carry out greater transformation; then the Father will say – wow, My Lovers have come! Whose Lovers are you? You are Lovers, you have been Lovers from before, but the Lovers have to be made even more Loving now, is it not – so that whoever may apply any other colour, that colour will not touch you.* OK?
We will Meet again ...

OK, ‘Love and Remembrance’ has also come from those children, ‘Love and Remembrance’ has also come from the residents of Madhuban (at Abu); and wherever the Kumaris and Mothers are sitting, those children who say – ‘Baba, I am helpless’ .. ‘Love and Remembrance’ to them also - those who are tied in one bondage or the other, the Father’s ‘Love and Remembrance’ to all of them; and those who are sitting in front, the Father’s manifold ‘Love and Remembrance’ to you also. OK? Do not get tied in any bondage, those who are in bondage do not become Sovereigns. The one who is in bondage can never become a Sovereign. You must be free – OK? The Father’s ‘Love and Remembrance’ to everyone!

OK, the Father’s ‘Love and Remembrance’ to all the children. If you children give 100-fold, the Father gives 200-fold, because the Father multiplies, and when He multiplies, it gets multiplied manifold! OK?
We will Meet again ...

(Then Baba took leave, after giving ‘dhristi’ to all the children)!
User avatar
destroy old world
Vishnu Party
Posts: 136
Joined: 09 Jul 2007
Affinity to the BKWSU: ex-BK

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by destroy old world »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

ॐ... "पिताश्री" शिवबाबा याद है?

शिवबाबा की वाणी
04.09.2022 - सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)

"मीठे बच्चे .. हर एक बच्चा विशेष ध्यान रखे, हर श्वास बहुत कीमती है। हर बच्चे के पास श्वासों का खजाना है। एक यही खजाना है जो आपका अपना है।"

Link: https://www.youtube.com/watch?v=_HtD4GJShLE

अच्छा .. आज बापदादा अपने स्नेह में डूबे हुए बच्चों से मिलन मनाने आए हैं। *बाप का वायदा है ना - साथ रहेंगे, साथ चलेंगे! जब तक संगमयुग है, तब तक बाप साथ रहेंगे।* देखो, बाप के प्यार में कितना दूर-दूर से बच्चे पहुँच गए ना! पहुँच गए ना? *हर एक बच्चा विशेष ध्यान रखे, हर श्वास बहुत कीमती है। हर बच्चे के पास श्वासों का खजाना है। एक यही खजाना है जो आपका अपना है – नहीं, आपका अपना कुछ नहीं है! तो हर श्वास में किसकी याद समाई हो? किसकी याद समाई हो - बाप की याद समाई हो।*

आप बच्चे इस संसार में यह सोचते हैं ना – ‘मैं यह हूँ, या मैं वो हूँ’। पर जैसे ही मंदिर में जाते हैं, या बाप के पास आते हैं, सब भूल जाते हैं, कि मैं कौन हूँ - मैं क्या हूँ? हर एक बच्चा अपने स्वमान को याद करें। आज आप जहाँ इकट्ठे हुए हैं - यह ‘मेला’ है। मेला - बाप और बच्चों का; मेला - आत्मा और परमात्मा का। यह मिलन हर बच्चे के लिए अविनाशी है। कितने ऐसे बच्चे हैं, जो कहते थे – ‘बाबा, हम तो मधुबन नहीं पहुँच पाएंगे, पर आप जरूर आना; अगर आपका प्यार है, तो आप मिलने के लिए आना’। तो बाप का बच्चों से कितना प्यार है! जहाँ बच्चे नहीं पहुँच पाए, वहाँ बाप पहुँच गए हैं!

अच्छा .. सदा याद रखें, ‘मुझे ब्रह्मा बाप समान बनना है - ‘समान’। जीवन में कोई भी पढ़ाई पढ़ते हैं, लक्ष्य होता है ना, कि मैं यह बनूँगा। तो आप बच्चों का क्या लक्ष्य है? क्या लक्ष्य है? कौनसी पढ़ाई पढ़ रहे हैं? *कौनसी पढ़ाई पढ़ रहे हैं? नारी से ‘श्री लक्ष्मी’ बनने की - नर से ‘नारायण’ बनने की पढ़ाई! तो सदा याद रखें – ‘मुझे ब्रह्मा बाप समान बनना ही है’* - ठीक है?

अच्छा .. आज बाप का इतना ही पार्ट है। अब आप सभी बच्चे ब्रह्मा बाप से मिलना।

(फिर बाबा ने सभी बच्चों को दृष्टि देकर, विदाई ली)!
User avatar
Zorba the Greek
Posts: 67
Joined: 03 May 2019
Affinity to the BKWSU: BK supporter
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To engage in fruitful discussions

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by Zorba the Greek »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

Versions of Shiv Baba
04.09.2022 - Saharanpur (U.P.)

"Sweet children .. Every child should pay special attention that your every breath is very precious. Every child has a treasure-trove in every breath. This is the only treasure which is your own."

Link: Baapdada Milan - 04.09.2022

OK .. today, BapDada has come to celebrate a Meeting with His children who are immersed in His Love. *The Father has made a promise, has He not – He will stay with you, and He will go along with you! As long as there is the Confluence Age, the Father will remain with you.* Look, from how far away the children have reached here in the Love of the Father! You have reached here, have you not? *Every child should pay special attention that your every breath is very precious. Every child has a treasure-trove in every breath. This is the only treasure which is your own – no, you have nothing of your own! So, whose Remembrance is merged in your every breath? Whose Remembrance is merged – the Father’s Remembrance is merged.*

In this world, you children think – ‘I am this, or I am that’. But as soon as you go to a temple, or as soon as you come to the Father, you forget everything - as to who you are, or what you are! Every child should remember your real self. The place where you have gathered today - this is a ‘Mela’ (gathering for a Meeting). This is a Meeting of the Father and His children; this is a Meeting of souls with the Supreme Soul. This Meeting is imperishable for each and every child. There were so many children who used to say – ‘Baba, we will not be able to reach Madhuban (at Abu), but you must definitely come; if you have Love for us, then you should come to Meet us’. *So, how much Love the Father has for His children! Since the children could not reach (in Madhuban, at Abu), the Father has reached here!*

OK .. always remember, ‘I have to become like Father Brahma – ‘equal to him’. When you are studying any study in your life, then you have an aim that you are going to become so and so. So, what is the aim of you children? What is your aim? Which study are you studying? *Which study are you studying? The study to become like ‘Shri Lakshmi’ from an ordinary woman, or like ‘Shri Narayan’ from an ordinary man! So, always remember that you have to definitely become like Father Brahma* – OK?

OK .. today, the Father has only this much part. Now, all of you children can Meet Father Brahma.

(Then Baba took leave, after giving ‘dhristi’ to all the children)!
User avatar
destroy old world
Vishnu Party
Posts: 136
Joined: 09 Jul 2007
Affinity to the BKWSU: ex-BK

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by destroy old world »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

ॐ... "पिताश्री" शिवबाबा याद है?

शिवबाबा की वाणी
06.09.2022 - हांसी (हरियाणा)

"मीठे बच्चे .. अब तो कर्म के महारथी बाप को चाहिए, बोलने वाले नहीं चाहिए। माइक तो बाप के पास बहुत हैं, आज ही खड़ा कर देगा, पर जो जीवन में उतारा, जिसने जीवन को बदला, जिसने बाप के कदम के ऊपर कदम रख के चले, जिसने विश्व परिवर्तन का दृढ़ संकल्प लिया, और करके दिखाया, वो महारथी बाप को चाहिए।"

Link: https://www.youtube.com/watch?v=viTVRjwA0Lw

अच्छा .. आज आप बच्चों को देखकर, आपका संगठन देखकर, बाप-दादा को बड़ी खुशी हुई है। कितना अच्छा परिवार है! एक बच्चे ने निमंत्रण दिया, और पूरा परिवार उस बच्चे के साथ खड़ा हो गया! यह कोई साधारण मनुष्य की ताकत नहीं है, यह बाप का प्यार है। जब एक बार आवाज आता है ना, कहीं से भी, बाप-दादा आए हैं, बाप आए हैं, तो वो बात ना, दिल में जाके लगती है कि कौन आए हैं! *और जब बच्चे बाप के सम्मुख होते हैं, तो बाप को बड़ा नशा चढ़ता है कि कौन आए हैं! ये इस सृष्टि को परिवर्तन करने वाले महान आत्माएं, देव आत्माएं, पुण्य आत्माएं बाप के सामने पधारे हैं।* बाप सभी बच्चों को, हर एक बच्चे को ताज पहना हुआ देख रहे हैं, हर बच्चे के मस्तक पर जिम्मेवारी का ताज बाप देख रहे हैं, विजय का तिलक बाप देख रहे हैं। बच्चों की विजय हुई पड़ी है, होगी ही - क्योंकि साथी कौन है? साथी कौन है – बाप-दादा साथी है! अपने दिल में कोई दुविधा लेकर मत बैठें, बस बाप को देखें। उस बाप को देखें जिस बाप को आप बच्चों ने अपना पूरा जीवन दिया। उस बाप को देखें, जब मिलते ही संकल्प किया – ‘बाबा, हम आपके हैं, आपके थे, आपके रहेंगे!’

*परिवर्तन तो नियम है ना, इस सृष्टि का सबसे पहला नियम ही परिवर्तन है। हाँ, फर्क इतना है कि वो परिवर्तन आपके हिसाब से नहीं होता, वो परिवर्तन बाप के हिसाब से होता है - इसलिए दिल, मन उस परिवर्तन को जल्दी स्वीकार नहीं कर पाता। परिवर्तन निश्चित है।* सतयुग के बाद त्रेतायुग आना, यह परिवर्तन निश्चित है। त्रेता के बाद द्वापरयुग आना, यह भी परिवर्तन निश्चित है। कलयुग आना, यह भी परिवर्तन निश्चित है। संगमयुग बाप के मिलन का युग है, यह भी परिवर्तन निश्चित है। यह परिवर्तन है, और यह निश्चित है। अगर बाप बच्चों के हिसाब से परिवर्तन करेगा, तो बाप के कितने बच्चे हैं, संख्या कितनी है? चलो, अगर बाप बच्चों के हिसाब से परिवर्तन कर भी दे, तो क्या ब्राह्मण बच्चों का एकमत, या एक संकल्प, यह निश्चित है? एक का? चलो, सौ का? हजार का भी अगर एक संकल्प करें ब्राह्मण बच्चे, तो भी परिवर्तन बच्चों के हिसाब से बाप करेगा। तो भी करेगा। पर क्या 100 बच्चे एक विचारधारा से चलेंगे? चलेंगे? .. [चलेंगे] चलेंगे! नहीं चलेंगे। 100 छोड़ो; 50 कहो, वो भी छोड़ो; 10 कहो, 10 भी छोड़ो; 5 कहो - जब 5 बच्चे भी एक विचारधारा से नहीं चल सकते, तो यह बाप तो करोड़ों आत्माओं का पिता है। 5 बच्चे भी एक विचारधारा से नहीं चल सकते, तो क्या बच्चों के हिसाब से परिवर्तन करना ठीक रहेगा? ठीक रहेगा? जब 5 बच्चों को बाप ने कहा, चलो 100 बच्चों को कहा - आप रथ चुनो कि बाप किस में आवे? उसमें से 20 बच्चे कहीं और उंगली करेंगे, 10 कहीं और करेंगे, 50 कहीं और करेंगे।

तो क्या करना चाहिए? बाप का हिसाब ठीक है? ‘बाप का हिसाब ठीक है’ - वो बच्चे हाथ खड़ा करें, दिल से, दिल से। ठीक है? तो बाप अपने हिसाब से परिवर्तन करे ना? अच्छा, ठीक है, तो बस अपने दिल पे हाथ रखे और कहे – ‘बाबा जो आपने किया, जो आप कर रहे हैं, वो मुझे स्वीकार है, मुझे स्वीकार है, मुझे स्वीकार है’। सबको स्वीकार है? [जी बाबा] *तो जब आप बच्चों को स्वीकार है, तो बाप को भी हर बच्चा दिल से स्वीकार है! हर बच्चे का संकल्प बाप को स्वीकार है; हर बच्चा बाप को स्वीकार है; हर बच्चे का सम्मान बाप को स्वीकार है; हर एक की दिल, चाहे कैसी भी हो, बाप को स्वीकार है! अगर सबको स्वीकार है, तो यह बाप का वायदा है कि - बाप साथ रहेंगे, साथ चलेंगे, और हर बच्चे का अंतिम समय तक साथ निभाएंगे।* भल बाप के कार्य में कोई विघ्न आवे, कितना बड़ा विघ्न आवे, पर बाप का कार्य रुक नहीं सकता! अगर बाप के प्रति प्रेम है, और उस प्रेम में हर बच्चे ने संकल्प किया, तो वो जरूर सिद्ध होगा - यह बाप का वायदा है। हर बच्चे से वायदा है। जहाँ भी मुश्किल आवे ना, अगर आपको लगे कि बाप के कार्य में कहाँ मुश्किल आ रहा है, तो एक मिनट बैठना, और कहना – ‘मेरे बाबा, मेरे साथी, आ जाओ, मेरी मदद करो’ - यह शब्द सबसे पहले बाप के कानों में पड़ता है, और सुनते ही बाप मदद के लिए हाज़िर हो जाते हैं!

अच्छा, सभी बच्चे खुश हैं? आज तो नन्हे-मुन्ने बच्चे भी आए हैं। ‘सच्चे दिल पर साहेब राज़ी!’ जहाँ दिल साफ है ना, वहाँ बाप हाज़िर है, नाज़िर है, और राज़ी है। यह मिलन .. हर बच्चे को मुबारक हो!

अच्छा, ब्रह्मा बाप की पालना में जो नहीं पले हैं .. क्योंकि विश्व का महाराजा आ रहा है ना, तो साथ तो चाहिए ना। साथ चाहिए? चाहिए? मिलेंगे? आने वाला समय ऐसा होगा कि सबको यही दिखाई देगा - कहाँ, कब आ रहे हैं, मेरे आदि पिता ब्रह्मा बाबा! तो बाप निमंत्रण दे रहे हैं, अब आ रहे हैं - आपके आदि पिता ब्रह्मा बाबा!

(बाबा को सभी की ओर से गुलदस्ता भेंट किया गया)
अच्छा मेहनत किया ना!

*जो कार्य इतने वर्ष में नहीं हो पाया वो कार्य बहुत जल्दी संपन्न होने वाला है। ज्ञान की, ज्ञान के अभिमान की चद्दर, उतार देवें, और बाप के कार्य में सहयोगी बन जावे। अभी समय है, फिर समय निकल जाएगा, फिर अभिमान की, ज्ञान के अभिमान की चद्दर उतारने का कोई फायदा नहीं रहेगा। फिर समय तेजी से चला जाएगा, और आप कहते रहना – ‘बाबा, अब हम तैयार हैं’। फिर बाप कहेगा - अब हम तैयार नहीं हैं।* ठीक है - क्योंकि बाप बच्चों के तैयार होने की इंतजार कब तक करेगा? अभी तक तो किया ना, संगमयुग पूरा बीत गया। किया ना? पर बाप का भी समय होता है। एक समय तक बाप इंतजार करेगा, पर अब नहीं करेगा। जो बच्चे अभिमान की चद्दर उतार के बाप का हाथ पकड़ेगा, उस बच्चे का दिल से वेलकम है - और अगर अभिमान की चद्दर ओढ़के बैठे रहना है, तो हर एक बच्चा अपना स्थान देखें - क्योंकि पीछे वाली सीट भी बुक हो गई है। और इतने बड़े महारथी पीछे बैठेंगे, तो कैसा लगेगा?

हर एक बच्चा सोचना, समझना, और बाप से पूछना कि बाबा क्या सही है? और महारथी कौन हैं? ‘महारथी’ नाम बड़ा ऊँचा है, पर बाप तो कार्य के महारथी ढूँढ रहे हैं। नाम के ढूँढना बंद कर दिया, अब तो कर्म के महारथी बाप को चाहिए, जो बाप के साथ विश्व की स्टेज पर जयकारा बोलेंगे – ‘मेरा बाबा आ गया [मेरा बाबा आ गया] आ गया!’ *अब कर्म के महारथी चाहिए, कर्म के! बोलने वाले नहीं चाहिए। माइक तो बाप के पास बहुत हैं, आज ही खड़ा कर देगा, पर जो जीवन में उतारा, जिसने जीवन को बदला, जिसने बाप के कदम के ऊपर कदम रख के चले, जिसने विश्व परिवर्तन का दृढ़ संकल्प लिया, और करके दिखाया, वो महारथी बाप को चाहिए।* और वो महारथी कोई महलों में नहीं हैं, वो महारथी कोई ऊँचे-ऊँचे महलों में नहीं हैं। अगर होंगे भी .. तो अच्छा, जल्दी आ जावे। वो महारथी तो झोपड़ी में बैठे हैं। तो अभी तो बाबा हर एक की झोपड़ी का दरवाजा खटखटा रहे हैं, कि आपका पिता आया है, आप भी आओ, चलो मिलके स्वर्ग बनाते हैं। अच्छा, फिर मिलेंगे ..

(एक दुखी माता के साथ मिलते हुए)
जो कार्य बचे हैं, उनको पूरा करें।

यह वरदानी हाथ बाप का हर एक बच्चे के सिर पर है। आप मधुबन में, मधुबन की स्टेज पर आप नहीं पहुँच पाते थे ना, इसलिए आपकी दिल की पुकार, बाप ने सुनी, और आपके पास चले आए हैं।
फिर मिलेंगे!

(फिर बाबा ने सभी बच्चों को दृष्टि देकर, विदाई ली)!
User avatar
Zorba the Greek
Posts: 67
Joined: 03 May 2019
Affinity to the BKWSU: BK supporter
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To engage in fruitful discussions

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by Zorba the Greek »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

Versions of Shiv Baba
06.09.2022 - Hansi (Haryana)

"Sweet children .. Now, the Father requires the Maharathis of action, not those who simply speak. The Father has many mikes, He can muster them today itself – but the Father needs those Maharathis who have imbibed within their lives, those who have changed their lives, those who have continued to move along by placing their steps over the steps of the Father, those who have taken a firm vow of world transformation, and who have demonstrated same."

Link: Baapdada Milan - 06.09.2022

OK .. Today, seeing you children, and seeing your gathering, BapDada feel extremely Happy. What a wonderful Family! One child extended the invitation, and the whole Family stood by that child! This is not the energy of an ordinary person, this is the Love of the Father. When the sound comes even once, from anywhere, that BapDada have come, that the Father has come, then that goes and touches the heart - as to who has come! *And when the children are in front of the Father, then the Father has great intoxication - as to who have come! These are the great souls, the Deity souls, the virtuous souls, who transform this world, who have come in front of the Father.* The Father is seeing all the children, each and every child, wearing a crown; the Father is seeing the crown of responsibility on the head of every child, the Father is seeing the ‘tilak’ of victory. The victory of the children is preordained, it will definitely take place – because who is your Companion? Who is your Companion – BapDada is your Companion! Do not sit with any doubt within your heart, just see the Father. See that Father, to whom you children have surrendered your entire life. See that Father, to whom you made a resolution, as soon as you met Him – ‘Baba, we belong to you, we were yours, and we will always be yours!’

*Transformation is preordained; the very first principle of this world is transformation. Yes, the only difference is that such transformation does not occur according to your expectations, such transformation takes place according to the will of the Father – and this is why, your heart, or your mind, is not able to accept such transformation immediately. Transformation is certain.* For the Silver Age to come after the Golden Age, this transformation is certain. For the Copper Age to come after the Silver Age, this transformation is also certain. For the Iron Age to come, even this transformation is certain. The Confluence Age is the Age of Meeting the Father, and this transformation is also certain. This is a transformation, and this is certain. If the Father were to carry out transformation according to the expectations of the children, then how many children does the Father have, how many are there? All right, if the Father carries out transformation according to the expectations of the children, then is any singular belief, or any singular thought of the Brahmin children unanimous? Even of one? All right, of one hundred? If the Brahmin children can have a single thought even among one thousand, then too the Father will carry out transformation according to the expectations of those children. Then, too, He would do so. But can even 100 children follow a single ideology? Can they? .. [we will] You will! You will not. Leave alone 100; say 50, leave that also; say 10, leave 10 also; say 5 – even 5 children cannot follow one ideology; and this Father is the Father of millions of souls. When even 5 children cannot follow one ideology, then would it be right to carry out transformation according to the expectations of the children? Would that be correct? If the Father tells 5 children - all right, if he tells 100 children – you select the Chariot in whom the Father should come! From among them, 20 children will point their fingers somewhere else, 10 will point somewhere else, 50 will point somewhere else.

So, what should be done? Is the will of the Father fine? ‘The will of the Father is fine’ – such children raise your hands - with your heart, with your heart. OK? So, the Father can carry out transformation according to His will, can He? OK, all right, then just keep your hand over your heart and say – ‘Baba, I accept what You have done, and what You are doing - I accept, I accept that’. Does everyone accept? [Yes, Baba] *So, when you children accept, the Father also accepts every child with His Heart! The Father accepts the thought of each child; the Father accepts every child; the Father accepts the regard of every child; the Father accepts everyone’s heart, regardless of how that may be! If everyone accepts, then this is the Father’s promise that – the Father will stay with you, will go along with you, and will accompany every child until the very end.* No matter what obstacle may come in the Father's task, however big the obstacle may be, but the Father's work can never stop! If you have Love for the Father, and if every child emerges any thought with that Love, then that thought will definitely be fulfilled – this is the Father’s promise. This is His promise to every child. Wherever any difficulty arises, if you feel that there is any difficulty in the task of the Father, then sit for a minute and say – ‘My Baba, my Companion, please come, come and help me’ – these words reach the ‘ears’ of the Father first of all, and as soon as He hears, He becomes present to help!

OK, are all the children Happy? Today, even small children have come (referring to the school children who have come to Meet the Father). ‘The Lord is pleased with an honest heart!’ The Father is present where the heart is pure, He is present and willing. Congratulations to every child .. for this Meeting!

OK, those who have not been nourished in the sustenance of Father Brahma .. because the Emperor of the World is coming, so you need his company, would you not? Do you need his company? Do you? Will you Meet him? In the time to come, everyone will just wait to see – where, and when, is my original (‘Alokik’) Father Brahma Baba coming! So, the Father (Shiv Baba) is giving him an invitation, he is coming now – your original Father Brahma Baba!

(a bouquet was presented to Baba on behalf of everyone)
You have made very good efforts!

*The task which could not be accomplished in so many years, that task is going to be completed very soon. Remove the veil of Knowledge, of the pride of Knowledge, and become co-operative in the Father's task. There is still some time now, then this time will pass away, then there will not be any benefit in removing the veil of pride, of the pride of Knowledge. Then, the time will pass away rapidly, and you may keep saying – ‘Baba, we are ready now’. Then Baba would say – I am not ready now.* OK? Because, how long will the Father wait for the children to be ready? He has waited until now, the Confluence Age has almost passed away completely. He waited, did He not? But the Father is also limited by time. The Father has waited till this time, but He will not wait now. Those children who remove the veil of pride (of Knowledge) and hold the Father’s Hand - such a child is welcome from His Heart – and if you wish to continue sitting with the veil of pride (of Knowledge) over you, then let every child check one’s place – because even the rear seats have been booked. And how would it feel, for such great Maharathis to be sitting behind?

Every child should think, understand, and ask the Father – ‘Baba, is this right?’ And, who are the ‘Maharathis’? ‘Maharathi’ – the name is very elevated, but the Father is looking for Maharathis of action. He has stopped looking for those in name; now the Father requires Maharathis of action, those who will cheer on the stage of the world, along with the Father – ‘My Baba has come [My Baba has come], He has come!’ *Now, the Maharathis of action are required - of action! Not those who simply speak. The Father has many mikes, He can muster them today itself – but the Father needs those Maharathis who have imbibed within their lives, those who have changed their lives, those who have continued to move along by placing their steps over the steps of the Father, those who have taken a firm vow of world transformation, and who have demonstrated same.* And such Maharathis are not inside any palaces; those Maharathis are not inside any elevated palaces. Even if they may be there .. then, all right, they should come soon. Those Maharathis (of action) are sitting in huts. So, now Baba is knocking on the door of everyone's hut, that your Father has come, you too should come, let's establish Heaven together. OK, we will Meet again ..

(while Meeting a mother who is sorrowful)
You should complete the tasks which are remaining.

This Father’s Hand of Blessings is over the head of each and every child. You were not able to reach Madhuban, the stage of Madhuban, and this is why the Father heard the invocation from you heart, and He has come to you.
We will Meet again!

(Then Baba took leave, after giving ‘dhristi’ to all the children)!
User avatar
destroy old world
Vishnu Party
Posts: 136
Joined: 09 Jul 2007
Affinity to the BKWSU: ex-BK

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by destroy old world »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

ॐ... "पिताश्री" शिवबाबा याद है?

शिवबाबा की वाणी
12.09.2022 - रायपुर

"मीठे बच्चे .. आज से हर एक बच्चा बुद्धि में याद रखे कि सुख देने वाला बाप सदा स्मरण रहे, याद रहे - क्योंकि बाप के अलावा इस संसार में कोई सुख का रास्ता नहीं बता सकते।"

Link: https://www.youtube.com/watch?v=846HMyd5-0o

अच्छा .. सभी - आज हर एक बच्चा बाप के मिलन की आश में बैठा है ना। बाप से मिलने के बाद, या मिलने के पहले, कहाँ-कहाँ भटक के आए हैं ना। कितना भटके हैं! *बाप जब मिला, तब भी भटकते ही रहे; नहीं मिला, तो भक्ति मार्ग में भटकते रहे; मिल गया, तो निश्चय ना होने के कारण भटकते रहे। पर अब लास्ट समय है, बाप मिल गया है - अब भटकना बंद करें!* यह उनके लिए है, जो बाप के मिलने के बाद भी भटकते हैं। अब बाप उन बच्चों से भी मिल रहा है, जिन बच्चों को बाप से अति स्नेह है, प्यार है। बस एक आवाज आयी – ‘मेरा बाबा आया है’ तो सभी बच्चे दौड़े चले आए, यह उनके लिए है। उन बच्चों को भी बापदादा का दिल व जान से याद-प्यार।

बहुत दूर से आए हैं। कौन? दूर से कौन आए हैं? कितनी दूर से आए हैं? आप दूर से आए हैं - या बाप दूर से आए हैं? दोनों ही दूर से आए हैं ना! क्योंकि जो आपका घर है वही बाप का घर है, और जो बाप का घर है वही आपका भी घर है। तो दूर से तो हर एक बच्चा आया है ना। पर जब बाप ने नीचे भेजा, तो राम-राज्य में थे; पर जब बाप ने नीचे आके देखा, तो कहाँ मिले? रावण-राज्य में मिले, और बाप को भी रावण-राज्य में आना पड़ा। क्यों? क्यों - क्योंकि बच्चों के पीछे बाबा है। जहाँ बच्चे जाएंगे बाबा पीछे-पीछे आएंगे। पर जब परमधाम में जाएंगे तो साथ लेके जाएंगे। जब परमधाम से नीचे आएंगे तो बाबा पीछे आएंगे।

*बाबा हर बच्चे का चारों युगों में साथ निभाता है! मालूम है? बस, सतयुग में आप बाप को देख नहीं पाते हैं, पर साथ तो तब भी होता है - क्योंकि सुख इतना है ना, सुख में बाप की याद कब आती ही नहीं है; तो बाप दिखाई देगा ही नहीं। पर जब दुःख आता है, तो सब उसको याद करते हैं ना।* क्यों याद करते हैं, बाप को? दुःख में क्यों करते हैं? क्यों करते हैं - क्योंकि मालूम है कि वो एक ही है जो इन दुखों के भवसागर से सुख की नाव में बिठाने वाला है। क्योंकि इतने मनुष्य के साथ 84 का चक्र लगाया, पर क्या पाया? दुःख पाया ना। तो मालूम है कि जरूर सुख देने वाला कोई और है। तो जो सुख देने वाला है - याद किसको करते हैं - जो सुख देने वाला है। *तो आज से हर एक बच्चा बुद्धि में याद रखे कि सुख देने वाला बाप सदा स्मरण रहे, याद रहे - क्योंकि बाप के अलावा इस संसार में कोई सुख का रास्ता नहीं बता सकते।*

अच्छा, सभी बच्चों को बापदादा का बड़ा मीठा याद-प्यार!

ब्रह्मा बाप का राज्य आने वाला है, तो ब्रह्मा बाप हर एक बच्चे से मिलेगा - क्योंकि सतयुग का राजा कौन है? जो कहते हैं, ‘हम ब्रह्मा बाप को नहीं मानते’ - तो उनको बाप कहेगा कि आप फिर (शिव) बाप को भी नहीं मानते। क्योंकि मुक्ति का वर्सा तो बाप देगा, पर जीवन-मुक्ति का वर्सा वाया मिलेगा, जिनको ब्रह्मा बाप से भी प्यार है। पर अब कहने की बात नहीं, क्योंकि ब्रह्मा बाबा ना, सबके दिल पे छा गए हैं, तो प्यार तो ऑटोमेटिकली हो गया है। कोई अज्ञानी भी मिलेगा ना, वो भी कहेगा मुझे इस (ब्रह्मा) बाबा से प्यार है। *दिखाते हैं ना, सतयुग में कृष्ण लीलाएं चली - तो वो सतयुग की बात नहीं है, वो इस संगमयुग की बात है!*

अच्छा बच्चों, सभी को बाप-दादा का याद प्यार!

(फिर बाबा ने सभी बच्चों को दृष्टि देकर, विदाई ली)!
User avatar
Zorba the Greek
Posts: 67
Joined: 03 May 2019
Affinity to the BKWSU: BK supporter
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To engage in fruitful discussions

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by Zorba the Greek »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

Versions of Shiv Baba
12.09.2022 - Raipur

"Sweet children .. from today every child should remember within their intellects that they should always Remember the Father who gives Happiness – because no one in this world can show the path to Happiness, apart from the Father."

Link: Baapdada Milan - 12.09.2022

OK .. Everyone – today, every child is sitting with the desire of Meeting the Father. After Meeting the Father, or before Meeting Him - you have come after having wandered somewhere or the other, have you not? You have wandered so much! *You continued to wander even after Meeting the Father; when you did not Meet Him, then you continued to wander on the path of devotion; when you Met Him, you continued to wander because of lack of faith. But this is the last period - you have found the Father, now you should stop wandering!* This is for those who have wandered even after Meeting the Father. Now, the Father is Meeting those children who have extreme Love for the Father. You just heard one sound – ‘my Baba has come’, then all the children came running, this is for those children. BapDada’s Remembrance and Love from His Heart for those children also.

You have come from far away. Who? Who have come from far away? From how far away have you come? Have you come from far away – or has the Father come from far away? Both have come from far away! Because your Home is also the Father’s Home, and the Father’s Home is also your Home (Soul World). So, every child has come from far away. But when the Father sent you down here, then you were in the Kingdom of RAMA; but when the Father came and saw you down here, then where did He Meet you? He met you in the kingdom of Ravan, and the Father too had to come in the kingdom of Ravan. Why? Why – because Baba is behind the children. Baba will come behind the children wherever they go. But when He goes back to the Supreme Abode, He will take you along with Him. When you come down from the Supreme Abode then Baba will come behind you.

*Baba is with every child in all the four ages! Do you know? It is just that you are unable to see the Father in the Golden Age, but He is with you even during that period – because you have so much happiness, that the remembrance of the Father never emerges in that happiness; so, you will not see the Father at all. But when sorrow comes, then everyone remembers Him.* Why do they remember the Father? Why do they remember Him in sorrow? Why do they do that – because they know that He is the only One who will make them sit in the Boat of Happiness in this ocean of sorrow. You have gone around the Cycle of 84 births along with so many human beings - but what did you receive? You received sorrow. So, you know that the One who gives Happiness is definitely someone else. So, the One who gives Happiness – whom do they remember – the One who gives Happiness. *So, from today every child should remember within your intellects that you should always Remember the Father who gives Happiness – because no one in this world can show the path to Happiness, apart from the Father.*

OK, BapDada’s Sweetest Remembrance and Love to all the children!

The Kingdom of Father Brahma is about to come, so Father Brahma will Meet with every child – because who is the Emperor of the Golden Age? Those who say, ‘we do not believe in Father Brahma’ – then the Father will tell them that they do not believe in the Father (Shiva) also. Because the Father will give you the inheritance of Liberation, but those who also have Love for Father Brahma will receive the inheritance of Liberation-in-Life through him. But now, it is not a question of just saying, because Father Brahma has touched everyone’s heart, so you automatically have Love for him. Even if the one who is not in Knowledge Meets him, that one will also say that ‘I have Love for this (Brahma) Baba’. *They show that Krishna’s pastimes (of pleasure) went on in the Golden Age, do they not – but that aspect does not pertain to the Golden Age, it pertains to this Confluence Age, now!*

OK children, BapDada’s Remembrance and Love to everyone!

(Then Baba took leave, after giving ‘dhristi’ to all the children)!
User avatar
destroy old world
Vishnu Party
Posts: 136
Joined: 09 Jul 2007
Affinity to the BKWSU: ex-BK

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by destroy old world »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

ॐ... "पिताश्री" शिवबाबा याद है?

शिवबाबा की वाणी
07.09.2022 - दिल्ली

"मीठे बच्चे .. बच्चे बुलावे, और बाप नहीं आवे, ऐसा कभी हो नहीं सकता!"

Link: https://www.youtube.com/watch?v=2qHb9FZgzEU&t=619s

अच्छा .. बच्चों का संकल्प - इतना बाप के प्रति प्रेम - तो बाप को तो आना ही था ना! यह मिलन - हर एक के दिल में बाप का प्यार, लगन - यह प्यार ही, खींच के लेके आया है ना! *बच्चे बुलावे, और बाप नहीं आवे, ऐसा कभी हो नहीं सकता!* एक बारी नहीं, बारी-बारी मिल रहे हैं ना। मिल रहे हैं ना? कम समय में कितनी रफ्तार है! कितनी बारी मिले – सोचो! मिलन का, और प्यार का रिटर्न क्या देंगे? क्या देंगे? क्योंकि बाप का प्यार तो हर एक बच्चे से है, रहेगा भी। *बाप का प्यार निस्वार्थ प्यार है - सदा है, सदा रहेगा।* हर एक बच्चा इतने प्यार से बाप का आह्वान करता है - बाप तो आएगा ही, पर इस प्यार का रिटर्न क्या है? [सेवा] .. सेवा - और क्या है? पहला रिटर्न है स्वयं का परिवर्तन। जो इतने समय से, बाप के तो बने - जो सिखाया, खान-पान की शुद्धि तो की - पर जो संस्कारों का परिवर्तन होना चाहिए, उसमें पीछे रह गए ना!

परिवर्तन माना क्या? जो आपको देखकर कहे, कि ये किसके बच्चे हैं? ये फरिशते कौन हैं? जो आपसे मिलकर के लगे, कि इनका जो हमारे प्रति प्रेम है ना, वो दिखावे का नहीं है, वो मतलब का नहीं है - वो सच्चा प्यार है। क्या ऐसा प्यार है? बाप को कैसा प्यार है? तो कैसा बनना है? बाप-समान बनना है। समान बनना है - तो समान की निशानी क्या होगी? *अगर किसी को निस्वार्थ प्रेम है, तो यह समान की निशानी है।* अगर बुद्धि में थोड़ा भी लालच आया, तो यह बाप-समान नहीं, यह मनुष्य-समान बनने की निशानी है, क्योंकि देवताएं भी मांगते नहीं हैं। हर एक बच्चे को दाता बनना है। क्या बनना है? दाता! बन गए हैं - या बनना बाकी है? [बाकी है] .. बाकी है!

बहुत ऐसे भी बच्चे हैं, आने वाले भी हैं - जिनको बाप से प्यार नहीं है, पर बाप के पास आते हैं, मिलन में आते हैं – ‘कहाँ हमारा कोई कार्य बन जावे, कहाँ कोई थोड़ा भीड़ मिले जो हमारा कार्य चलता रहे’ - यह भी स्वार्थ है। बाप के मिलन में ‘निस्वार्थ भावना’, ‘निस्वार्थ प्रेम’, एक दूसरे से ‘निस्वार्थ मिलन’। आज से ‘स्व-परिवर्तन’! *आप जैसे ही परिवर्तन हो जाएंगे आपको देखकर विश्व अपने आप परिवर्तन होगा।* और ऐसा नहीं सोचना है कि मुझे कितने लोग देखेंगे – नहीं! आप जब भी सूक्ष्म सेवा करेंगे, मनसा सेवा करेंगे, आपके ऊपर एक की दृष्टि नहीं होगी, अनेक आत्माओं की दृष्टि होगी - सिर्फ यह सोचना नहीं है, ‘इस शरीर को देख रहे हैं’ – नहीं, मुझ आत्मा को! ‘मैं फरिश्ता बनके पूरे विश्व का चक्कर लगा रहा हूँ, वो रूप सारा संसार देख रहा है’ - ऐसे स्व-परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन होगा। प्यार का रिटर्न बाप को देंगे ना? देंगे ना? यह तो नहीं सोचेंगे – ‘बाबा, शरीर तो छोड़ना ही है, क्यों बदले?’ ऐसा तो विचार नहीं आएगा? जब लौकिक दुनिया के प्यार में अपने आप को इतना बदल देते हैं, तो यह किसका प्यार है? पारलौकिक बाप का प्यार है! तो कितना परिवर्तन होना चाहिए! होना चाहिए ना?

हर एक बच्चा संकल्प करके जावे - क्योंकि समय कम है। अब यह सोचना नहीं कि बाबा तो बहुत समय का बोल रहे हैं – ‘समय कम है’। *पर अब चारों तरफ हलचल का माहौल बन गया है, अब समय सच में ही कम है – कम-कम माना ‘बिल्कुल कम’!* कहाँ जीवन में अपने ही शौक पूरे करने में समय ना गुजर जावे। एक-एक श्वास सफल करना है। करेंगे? करेंगे? [जी बाबा] .. अभिमान साथ में नहीं जाने वाला है; और करें भी तो किस चीज का करें? कुछ साथ में रहेगा? क्या कोई चीज फिक्स है? मित्र-संबंधी फिक्स हैं? उनका छोड़ो - क्या आप फिक्स हैं? है? नहीं है। कोई फिक्स नहीं है - सबको जाना है, जल्दी-जल्दी जाना है। *कहाँ सूक्ष्म में भी अभिमान नहीं आवे - क्योंकि अभिमान माना चकनाचूर हो जाना!* ठीक है?

‘मैंने कितने बच्चों को मिलाया है, मैं क्या करता हूँ, मेरे पास क्या-क्या है’ - किसी काम का नहीं है। मेरे पास कितना ज्ञान है, या कितनी किताबें पढ़ी हैं - अगर अभिमान है, तो यह ज्ञान किसी काम का नहीं है। क्योंकि जो किताबें पढ़ी हैं ना, वो यहीं पर ही पढ़ी हैं, यहीं पर ही छूट जाएंगी। और जब ऊपर जाएंगे, तब जो बाप किताब सामने रखेगा - और फिर कहना, ‘यह तो मैंने पढ़ी ही नहीं’! फिर क्या होगा? क्या होगा? .. *इसीलिए जो बाप पढ़ा रहे हैं ना - ‘आत्म-अभिमानी भव’! ‘आत्म-अभिमानी बनो, देह का अभिमान छोड़ो’ - यह नंबरवन किताब है, और यही किताब बाप धर्मराजपुरी में खोलेगा;* अगर किस ने देह की किताबें पढ़ी हैं, तो अभी बंद कर देना। मैं आत्मा हूँ, मेरा पिता परमपिता है, मुझे उनके साथ जाना है, यह स्वधर्म भूले नहीं। सबको याद रहेगा? पक्का याद रहेगा? मैं कौन? [आत्मा] ‘आत्मा’ - सिर्फ सुनने मुआफ़िक नहीं - आत्मा बन जाना है!

अच्छा, फिर मिलेंगे ..

(फिर बाबा ने सभी बच्चों को दृष्टि देकर, विदाई ली)!
User avatar
Zorba the Greek
Posts: 67
Joined: 03 May 2019
Affinity to the BKWSU: BK supporter
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To engage in fruitful discussions

Bap-Dada's LATEST & FINAL part

Post by Zorba the Greek »

🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️

Versions of Shiv Baba
07.09.2022 - Delhi

"Sweet children .. It can never happen that the children call, and the Father does not come!"

Link: https://www.youtube.com/watch?v=2qHb9FZgzEU&t=619s

OK .. the thought of the children – with so much Love for the Father – so, the Father had to come! The Devotion and Love for the Father, and for this Meeting – it is this Love which has attracted and brought Him here! *It can never happen that the children call, and the Father does not come!* Not just once, but He is Meeting you again and again. He is Meeting you! There is so much speed in such a short period! How many times has He met you – just think! What return would you give for His Meeting and His Love? What would you give? Because the Father has Love for every child, and He will always have (this Love). *The Father’s Love is altruistic – such Love is always there, and will always be there.* Every child invokes the Father with so much Love – the Father would definitely come, but what is the return for this Love? [Service] .. Service – and what else? The very first return is the transformation of the self. You have belonged to the Father since such a long period – according to what you were taught, you observed purity in food and drink – but you remained behind in the transformation of your sanskars!

What does ‘transformation’ mean? That anyone who looks at you would say, ‘whose children are these - who are these angels?’ That anyone who meets you would feel that the Love which this one has towards me is not just for show, with a certain purpose behind it – this one has true Love. Do you have such Love? How is the Father’s Love? So, how have you to become? You have to become like the Father. You have to become like Him – and what would be the sign of being like Him? *When anyone has selfless Love, then this is the sign of being like Him.* If even the slightest avarice enters the intellect, then that is not being like the Father, that is the sign of being like a human being, because Deities do not ever ask (for anything). Every child should become a bestower. A bestower! Have you become – or, have you still to become? [We have to become] .. You have still to become!

There are also many such children, and there are also those who have still to come – who do not have Love for the Father, but they come to the Father in order to Meet Him, thinking - ‘let some of our work be done, let us meet with such a crowd so that our work continues to prosper’ – this too is selfishness. When you Meet the Father, you should have selfless feelings, selfless Love, and selfless meeting with one another. From today, let there be ‘self-transformation’! *As soon as you achieve transformation, the world would automatically get transformed, by seeing you.* And you should not think as to how many people will see you – no! Whenever you perform subtle service, when you perform service through your mind, there would not be the vision of just one over you, there would be the vision of innumerable souls – you should not just think that ‘they are looking at this body’ – no; (they are looking) at me, the soul! ‘I am taking a round of the whole world by becoming an Angel, and the whole world is seeing that form’ – only through such self-transformation, will world transformation take place. You will give the return of the Father’s Love, will you not? Will you? You would not think – ‘Baba, I have to leave this body anyway, so why to change?’ You would not have such a thought, would you? When you can change your self so much in the love of the corporeal world – then, whose Love is this? This is the Love of the Incorporeal Father! Then how much transformation should take place! It should take place, is it not?

Every child should make a firm resolution – because the time is short. Now, you should not think that Baba has been saying since a long period that – ‘time is short’. *But now, there is an atmosphere of commotion all around, now the time is really short – short means, ‘extremely short’!* You should not while away your time by fulfilling your own desires of this life. Let every breath be fruitful. Will you do so? Will you? [Yes, Baba] .. Your pride will not go along with you; and if you have (pride), of what would that be? Will anything remain with you? Is anything fixed? Are your friends and relatives fixed? Leave those – are you fixed? Are you? No one is fixed – everyone has to leave, and you have to leave quickly. *Let pride not come even in a subtle form – because to have pride means to get shattered!* OK?

‘How many children did I enable to have a Meeting, what am I doing, what all do I have with me’ – all this is of no use. ‘How much Knowledge do I have, or how many books have I read’ – if there is pride in this, then this Knowledge is of no use at all. Because, the books which you have read have been read here, and will be left here itself. And when you go up, then the Father will keep a Book in front of you – and then you will say, ‘I have not read this at all’! What would happen then? What would happen? .. *Therefore, what is the Father teaching – ‘become soul-conscious’! ‘Become soul-conscious, leave the consciousness of the body’ – this is the number one Book, and the Father will open this same Book in the region of Dharamraj;* if anyone has read books of the body, you should close them now. ‘I am a soul, my Father is the Supreme Soul, I have to go along with Him’ – do not forget your religion of the self. Will everyone remember? Will you definitely remember? Who am I? [A soul] .. A soul – not just for the sake of hearing – you have to become (experience yourself to be) a soul!

OK, we will Meet again ..

(Then Baba took leave, after giving ‘dhristi’ to all the children)!
Post Reply

Who is online

Users browsing this forum: No registered users and 1 guest