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by Zero Zero
05 Dec 2022
Forum: For BKs - to discuss BK experiences
Topic: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

पहले बाप का परिचय देना है। बाप पतित-पावन है, उन द्वारा हम पावन बन रहे हैं। बाप कहते हैं – बच्चे, यह अन्तिम जन्म पावन बनेंगे, तो विश्व के मालिक बनेंगे। कितनी बड़ी कमाई है। बाप कहते हैं - धन्धा आदि भल करो, सिर्फ मुझे याद करो, पावन बनो - तो योगबल से तुम्हारी खाद निकल जायेगी। तुम सतोप्रधान बन जायेंगे, ए...
by Zero Zero
04 Dec 2022
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Topic: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

विवेक कहता है - भारत जब पावन था, सम्पूर्ण निर्विकारी था, तब धनवान भी बहुत थे। ऐसा धनवान और पवित्र किसने बनाया? क्या गंगा स्नान करने से बनें - या शास्त्रों को पढ़ने से बनें? यह तो तुम करते ही आये हो - फिर भी पुकारते हैं कि ‘हे पतित-पावन आओ’। जब पतित दुनिया का समय पूरा होगा तब ही पतित-पावन बाप आकर स्व...
by Zero Zero
03 Dec 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

जीवन में उड़ती कला वा गिरती कला का आधार दो बातें ही हैं (1) भावना और (2) भाव। अगर किसी भी कार्य में, कार्य प्रति, या कार्य करने वाले व्यक्ति के प्रति, भावना श्रेष्ठ है, तो भावना का फल भी श्रेष्ठ स्वत: ही प्राप्त होता है! एक है सर्व प्रति कल्याण की भावना; दूसरी है, कोई कैसा भी हो, लेकिन सदा स्नेह और...
by Zero Zero
03 Dec 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

देवतायें जो पावन थे, अभी पतित बने हैं, इसलिए सभी पुकारते हैं कि ‘हे पतित-पावन आओ, आकर हमें लिबरेट करो’। किससे? माया रावण से, अथवा शैतान से। मनुष्यों को यह समझ में नहीं आता है कि अभी चलना है। नव-युग, सतयुग अब आया कि आया। गीत में भी कहते हैं नवयुग, वह है पवित्र दुनिया। बाप आते ही हैं पतित से पावन बनान...
by Zero Zero
01 Dec 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

बेहद का बाप बैठ बेहद के बच्चों को समझाते हैं। ऐसे तो कोई होता नहीं जो कहे कि बेहद के बच्चों प्रति समझाते हैं। बच्चे समझते हैं कि हमारा बेहद का बाप वह है, जिसको ‘शिवबाबा’ कहते हैं। यूँ तो बहुत मनुष्य हैं जिनका नाम ‘शिव’ होता है। परन्तु वह कोई बेहद का बाप नहीं। बेहद का बाप एक ही (निराकार शिवबाबा) है, ...
by Zero Zero
30 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

मीठे-मीठे बच्चे जानते हैं - हम अपनी नई तकदीर बनाने यहाँ आये हैं। किसके पास? योगेश्वर के पास, सिखलाने वाले ईश्वर के पास। इसको कहते हैं ‘राजयोग’। ईश्वर योग सिखलाते हैं, कौन सा योग? हठयोग तो अनेक प्रकार का है। यह जिस्मानी योग नहीं है। संन्यासियों का तत्व योग, ब्रह्म योग है। उनको, ईश्वर योग नहीं सिखाते।...
by Zero Zero
30 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

तुम बच्चों को सारे विश्व पर घेराव डालना है, अर्थात् पतित दुनिया को पावन बनाना है। सारे विश्व को दु:खधाम से सुखधाम बनाना है। अच्छे स्टूडेन्ट्स को देख टीचर को भी पढ़ाने में मज़ा आता है। तुम तो अभी स्टूडेन्ट के साथ-साथ बहुत ऊंच टीचर बने हो। जितना अच्छा टीचर, उतना बहुतों को आपसमान बनायेंगे, कभी थकेंगे न...
by Zero Zero
28 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

परमात्मा एक है, वह ऊंच ते ऊंच है। उनकी महिमा भी ऊंच है। इस समय ऊंचे ते ऊंचा कर्तव्य करते हैं। उनका धाम भी ऊंचे ते ऊंचा है, नाम भी ऊंच है। और किसको ‘परमात्मा’ नहीं कहते। परमात्मा के लिए ही गायन है – ‘हे पतित-पावन’ - आते भी हैं पतित दुनिया और पतित शरीर में। पतित शरीर का नाम है प्रजापिता ब्रह्मा। इसमें...
by Zero Zero
27 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

इस श्रीकृष्ण (प्रजापिता ब्रह्मा - दादा लेखराज) की आत्मा को 84 जन्म जरूर लेने हैं। 21 जन्म सुन्दर, 63 जन्म श्याम। अब उनकी लात पुरानी दुनिया तरफ है, मुँह नई दुनिया तरफ है। जो नम्बरवन पूज्य था, वही पुजारी बन, अब लास्ट नम्बर में है। खुद ही पुजारी बन, नारायण की पूजा करते थे। अब खुद ही पूज्य नारायण बनते ...
by Zero Zero
26 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

दुनिया के हिसाब से नया वर्ष मनाते हैं, नये वर्ष की बधाइयां देते हैं, वा एक-दो को नये वर्ष की निशानी गिफ्ट भी देते हैं। लेकिन बाप और आप नव युग की मुबारक देते हो। सर्व आत्माओं को खुशखबरी सुनाते हो कि अब नव युग, अर्थात् गोल्डन दुनिया, ‘सतयुग' वा ‘स्वर्ग' आया कि आया! यही सेवा करते हो ना? यही खुशखबरी सुन...
by Zero Zero
25 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

(शिव) भोलानाथ वर्सा देते हैं - शंकर वर्सा नहीं देते। ऐसे भी नहीं शंकर कोई शान्ति देते हैं – नहीं! शान्ति देने लिए भी (शंकर को) साकार में आकर समझाना पड़े। शंकर तो साकार में आते नहीं। (शिव) भोलानाथ ही शान्ति, सुख, सम्पत्ति, बड़ी आयु भी देते हैं। हर चीज़ अविनाशी देते हैं क्योंकि अविनाशी बाप है, वर्सा भ...
by Zero Zero
24 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

महाभारत लड़ाई सामने खड़ी है। विनाश अवश्य होना ही है - इसलिए बेहद के बाप और वर्से को याद करो। हे आत्मायें सुनती हो? ‘हम आत्मा हैं, परमात्मा बाप हमको पढ़ाते हैं’। जब तक यह पक्का निश्चय नहीं, गोया कुछ भी नहीं समझेंगे। पहले यह निश्चय करें कि हम आत्मा अविनाशी हैं। हम अशरीरी आत्मा, शरीर में आकर प्रवेश कर...
by Zero Zero
23 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

जितना बाप को याद करेंगे, उतना विकर्माजीत, निरोगी बनेंगे। है बहुत सहज, परन्तु माया अथवा पास्ट के विकर्म सामने आते हैं, जो याद में विघ्न डालते हैं। बाप कहते हैं - तुमने ही आधाकल्प अयथार्थ रीति से याद किया। अभी तो तुम प्रैक्टिकल में आह्वान करते हो क्योंकि तुम जानते हो कि बाबा आया हुआ है। परन्तु यह याद...
by Zero Zero
22 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

तुम हो सच्चे-सच्चे खुदाई खिदमतगार बच्चे। सोसायटी की सर्विस करना, यह खिदमत है ना? तुम बच्चे जानते हो कि वह सब आसुरी सोसायटी हैं - अब उनको दैवी सोसायटी बनाना है। सारी दुनिया की सोसायटी को स्वर्ग में पहुँचाना है। सारी दुनिया का बेड़ा गर्क है। दुनिया पहले स्वर्ग थी। अब नर्क बन गई है। यह चक्र कैसे फिरता ...
by Zero Zero
21 Nov 2022
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Re: Extracts from the Sakar Murlis published by BKs

लक्ष्मी-नारायण को शिवबाबा ने ब्रह्मा द्वारा यह राज्य दिया - परन्तु मनुष्य समझते नहीं। जो भगवान आकर समझाते हैं कि मनुष्य से देवता बनना है - दैवीगुण धारण करो, तो भी समझते नहीं। जैसे बाप ने लक्ष्मी-नारायण को ऐसा बनाया - वह अब तुमको भी बना रहे हैं। तो पुरुषार्थ कर सर्वगुण सम्पन्न बनना चाहिए। देखना चाहिए...